अंबिकापुर : कम मुआवजा मिलने से नाराज बुजुर्ग किसान टॉवर पर चढ़ा

ओड़गी, अंबिकापुर । मध्यप्रदेश के सिंगरौली से छत्तीसगढ़ के सीपत तक बिछाई जा रही टॉवर लाइन के कारण काटे गए पेड़ और ली गई जमीन के एवज में कम मुआवजा देने का आरोप लगा वृद्घ कृषक कई फीट ऊंचे टॉवर में चढ़ गया। लगभग 12 घंटे तक वह टॉवर में चढ़ा रहा।

मध्यरात्रि के बाद पुलिस के हस्तक्षेप और उचित मुआवजे के आश्वासन के बाद वृद्घ कृषक टॉवर से नीचे उतरा। तब जाकर पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों ने राहत की सांस ली। सुबह से कई गांव वाले पेड़ कटाई के विरोध में उतर आए और पेड़ों के पास जाकर बैठ गए। इससे टॉवर लाइन बिछाने का काम प्रभावित हुआ।

मध्यप्रदेश के सिंगरौली से छत्तीसगढ़ के सीपत तक टॉवर लाइन बिछाई जा रही है। वर्तमान में टॉवर खड़ा कर तार खींचने का काम ओड़गी विकासखंड के दुरस्थ बिहारपुर इलाके में चल रहा है। टॉवर खड़ा करने ग्रामीणों की जमीन ली जा रही है और जो पेड़ टॉवर लाइन के दायरे में आ रहे हैं, उनकी कटाई की जा रही है।

इसके एवज में मुआवजा दिया जा रहा है, लेकिन मुआवजे की रकम को लेकर ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं। यही वजह है कि बिहारपुर से लगे ग्राम ठांड़पाथर निवासी वृद्घ किसान रामकृपाल गुर्जर 52 वर्ष शनिवार दोपहर लगभग दो बजे ठांड़पाथर में स्थापित टॉवर के कई फीट ऊंचे हिस्से में चढ़कर विरोध करने लगा।

कृषक रामकृपाल का कहना था कि उसके नाम दो एकड़ जमीन है। लगभग 50 मीटर जमीन में एस्सार कंपनी ने टॉवर खड़ा किया है। साढ़े चार मीटर आकार के दशकों पुराने महुआ व दूसरे फलदार नौ बड़े पेड़ काटे गए हैं, जिसके एवज में उसे उचित मुआवजा नहीं दिया गया। कृषक द्वारा कम मुआवजा देने का आरोप लगा टॉवर पर चढ़ने की जानकारी मिलते ही पुलिस व प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया।

बिहारपुर पुलिस मौके पर पहुंचकर किसान को समझाइश देने में लगी रही, लेकिन वह समझने तैयार नहीं था। ऐसे में देर रात ओड़गी से पुलिस व प्रशासन आलाधिकारी ठांड़पाथर पहुंचे और किसान को आश्वासन दिया कि प्रावधानों के अनुरूप उसे मुआवजा दिया जाएगा।

उसका पक्ष सुनकर उसकी भावनाओं के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, इसके बाद देर रात लगभग दो बजे किसान टॉवर से नीचे उतरा, तब जाकर सभी ने राहत की सांस ली।

सुबह से शुरू हुआ अनोखा आंदोलन

रविवार सुबह से बिहारपुर क्षेत्र के कई गांवों में अनोखा आंदोलन शुरू हुआ। किसान टॉवर से उतरकर सुबह से स्वामित्व की जमीन पर खड़े दूसरे एक प़ेड के नीचे धरने पर बैठ गया। यह देख क्षेत्र के कुछ और गांवों में ग्रामीण अपनी जमीन पर खड़े फलदार पेड़ों के नीचे बैठ गए। उनका कहना था कि इन पेड़ों को इन्होंने हाथों से सींचकर बड़ा किया है।

ये उनकी आर्थिक मदद करते हैं। ऐसे में वह इन पेड़ों को कटते नहीं देख सकते, इसलिए पेड़ों के नीचे बैठे हैं। ग्रामीणों के आंदोलन को देखते हुए रविवार को टॉवर लाइन बिछाने का काम प्रभावित हुआ। खबर यह भी है कि सोमवार को क्षेत्र में वृह्द आंदोलन करने की तैयारी चल रही है।

विधायक के नेतृत्व में हुआ था आंदोलन

एस्सार कंपनी द्वारा बिछाए जा रहे टॉवर लाइन के एवज में प्रभावित किसानों, भू-स्वामियों को कम मुआवजा देने का आरोप कई दिनों से लग रहा है। किसानों की इस मांग का समर्थन करते विधायक पारसनाथ राजवाड़े के नेतृत्व में 28 जून को ठांड़पाथर क्षेत्र में सांकेतिक चक्काजाम किया गया था।

अगले दिन विधायक की मौजूदगी में एस्सार प्रबंधन तथा अधिकारियों में बैठक भी हुई, जिसमें गांव वाले भी थे। दलील दी जा रही है कि बैठक में जो समझौता हुआ था, उस अनुरूप मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों के निर्देशों की कंपनी अनदेखी कर रही है। बिहारपुर के पुरानटोला में कंपनी द्वारा आम व कटहल के कई पेड़ कटवा दिए हैं, जिसका मुआवजा उन्हें नहीं दिया जा रहा है।

भू-अधिग्रहण नहीं, टेलीग्राफ एक्ट के तहत राशि

मुआवजा को लेकर उपजे असंतोष के पीछे मुख्य कारण ग्रामीणों में जानकारी का अभाव होना बताया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण जहां टॉवर खड़ा करने ली जा रही जमीन को भू-अधिग्रहण मान रहे हैं, वहीं यह पूरा कार्य टेलीग्राफ एक्ट के अधीन आता है। बताया गया कि आम जनता को सुविधा उपलब्ध कराने टॉवर लाइन बिछाई जा रही है।

इसमें भू-अधिग्रहण के अनुरूप मुआवजा का प्रावधान नहीं होता। जबतक गांव वालों के बीच यह जानकारी सही तरीके से नहीं पहुंचेगी, तबतक दिक्कत रहेगी।

ओड़गी तहसीलदार सालिक गुप्ता का कहना है कि टॉवर लाइन के एवज में जो मुआवजा निर्धारित है, उसके तहत जिसके जमीन पर टॉवर खड़ा होता है, उसे 50 हजार रुपये तथा जिस जमीन से होकर लाइन गुजरी है, उसके अंदर पड़ने वाले जमीन का मुआवजा जमीन की कुल दर का 15 प्रतिशत दिए जाने का प्रावधान है।

– पेड़ कटाई के एवज में कम राशि भुगतान का आरोप लगाकर किसान टॉवर पर चढ़ा था। वह टॉवर से नीचे उतर चुका है। किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है। वह मान चुका है। टॉवर लाइन बिछाने में भू-अधिग्रहण नियम का पालन नहीं होता। टेलीग्राफ एक्ट के तहत राशि भुगतान का प्रावधान है।