अंबिकापुर व रायपुर में योजना फेल हुई तो बोधगया व पटना में किया धमाका

रायपुर। बिहार के बोध गया और पटना में वर्ष 2013 में सीरियल ब्लॉस्ट करने वाले रायपुर के दो साजिशकर्ता उमेर सिद्धिकी और अजहरुद्दीन उर्फ अजहर समेत पांच आतंकियों को शुक्रवार को पटना स्थित एनआइए की विशेष अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई।

इसके बाद रायपुर पुलिस और खुफिया विभाग को संभावित खतरे को ध्यान में रखकर अलर्ट किया गया है। इन आतंकियों के राजा तालाब और संजयनगर स्थित घर-परिवार के साथ रिश्तेदार, साथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

हालांकि कोर्ट के फैसले से उनके घरों में सन्नाटा पसरा हुआ है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि उमेर व उसके साथियों के पकड़े जाने के बाद से सिमी से जुड़े रायपुर के करीब 10 से 12 सदस्य अंडरग्राउंड हो चुके हैं। उनकी तलाश लगातार की जा रही है।

सिमी के छत्तीसगढ़ चीफ उमेर सिद्धिकी 1991 से सिमी से जुड़ा है। आइएम के खूंखार व टॉप मोस्ट आतंकी अमिल परवेज, अबू बसर, अब्दुल शुभान तौकीर से उमेर के गहरे संबंध रहे हैं। उमेर की दूसरी पीढ़ी नूरानी चौक राजातालाब में निवासरत है।

रमन मंदिर वार्ड में सालों रहकर उमेर ने ट्यूशन पढ़ाने की आड़ में आतंकी गतिविधियां संचालित करता आ रहा था। उमेर ने आइएम के बड़े आतंकियों के साथ मिलकर वर्ष 2013 में पीएम मोदी की अंबिकापुर-रायपुर में होने वाली जनसभा में बम ब्लॉस्ट की योजना बनाई थी।

उस समय एनआइए के सामने उसने कबूल किया था कि अक्टूबर 2013 में अंबिकापुर में विकास यात्रा के समापन अवसर पर भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की आमसभा में पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के कारण सिमी का आतंकी दस्ता सभा स्थल पर घुस नहीं पाया था, इसलिए उन पर हमले की साजिश नाकाम रह गई थी। इसके बाद उमेर ने साथी आतंकियों के साथ मिलकर बोधगया, पटना ब्लॉस्ट को फूलप्रूफ अंजाम दिया।

पिस्टल व विस्फोटक की डिलिवरी न होने से प्लान फेल

लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान 14 नवम्बर 2013 रायपुर में मोदी की चुनावी सभा में हमले की पूरी तैयारी की गई थी, लेकिन ऐन वक्त पर दो पिस्टल की डिलिवरी न होने के कारण पूरा प्लान फेल हो गया था। वहीं पुलिस व खुफिया विभाग ने उसी दिन शाम को उमेर समेत उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि यहां छिपे हैदर अली व उसके तीन साथी भाग निकले थे।

उमेर ने आमसभा की रेकी एक दिन पहले ही कर ली थी। आमसभा में पहले बम ब्लॉस्ट कर भगदड़ फैलाने फिर पिस्टल से नरेंद्र मोदी पर हमला करने की योजना का प्लान अब्दुल्ला उर्फ हैदर अली ने उमेर व अजहरूद्दीन के साथ मिलकर बनाई थी।

इसके लिए एक-एक पिस्टल की व्यवस्था अजहरुद्दीन ने कर ली थी, दूसरी पिस्टल और विस्फोटक की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी उमेर की थी, लेकिन समय पर हथियार की डिलिवरी न होने के कारण हमले की साजिश नाकाम हो गई। विस्फोटक सामान व पिस्टल रायगढ़ से लाया जाना था।

बचपन से सीमित दायरे में रहता था उमेर, संदिग्ध थीं गतिविधियां

उमेर को जानने वालों का कहना है कि वह बचपन से ही सीमित दायरे में रहता था। कॉलेज में दोस्तों और पड़ोसियों से उसने दूरी बनाकर रखी थी। हर समय वह घर पर ही रहता था।

पुलिस की तफ्तीश में खुलासा हुआ था कि कालीनगर के अब्दुल वाहिद खान, राजातालाब के शेख अजीजुल्ला खान से उसकी गहरी मित्रता थी और तीनों मिलकर सिमी के शहरी नेटवर्क को विस्तार देने का काम कर रहे थे। यही नहीं, बाहर से आने वाले सिमी और आइएम के आतंकियों के रायपुर आने पर रिसीव करने, रुकवाने के इंतजाम से लेकर साधन, संसाधन तीनों मिलकर उपलब्ध कराते थे। सिमी के बड़े लीडरों की रायपुर में तकरीर होती थी।