अधर में लटके केजरीवाल के हसीन सपने!

नई दिल्ली : केंद्र सरकार और दिल्ली की राज्य सरकार के बीच तनातनी जारी है। जहां राज्य सरकार केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार पर दमनकारी नीति अपनाने का आरोप लगा रही है वहीं केंद्र राज्य सरकार पर तरह – तरह के आरोप लगा रही है। इतना ही नहीं अब तो केंद्र सरकार ने दिल्ली विधानसभा में राज्य सरकार द्वारा पारित किए गए ऐसे बिलों और विधेयकों को लौटा दिया है जो कि स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार की ओर भेजे गए थे।

इन विधेयकों की संख्या 14 बताई जा रही है। दिल्ली की राज्य सरकार ने इन विधेयकों को केंद्र सरकार के प्रतिनिधि कहे जाने वाले उपराज्यपाल नजीब जंग के पास भेजा था। इस मामले में केंद्रीय गृहमंत्रालय का कहना है कि राज्य सरकार ने असंगत तरीके से इन विधेयकों को पारित करने की चेष्टा की है। इन विधेयकों को पेश करने और पारित करवाने में तय प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने का आरोप केंद्र सरकार ने आम आदमी पार्टी नीत राज्य सरकार पर मढ़ा है।

जिन विधेयकों को लौटाया गया है उनमें विधायकों की वेतन वृद्धि का मसला भी है यही नहीं आम आदमी पार्टी का चुनावी आधार जनलोकपाल विधेयक भी लौटाए गए विधेयकों में शामिल है। इस मामले में राज्य के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्विट कर लिखा कि दिल्ली सरकार ने 10 बार प्रक्रिया पूर्ण कर इन विधेयकों को केंद्र को भेजा है मगर केंद्र सरकार बिल पारित करने में परेशानियां खड़ी कर रही है। वह इन विधेयकों को पारित नहीं होने दे रही है।

केंद्र सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद विधेयक विधानसभा में पेश किया जा सकता है। इसे पारित किया जा सकता है जिसके बाद विधेयक उपराज्यपाल को भेजना होता है। उपराज्यपाल के पास विधेयक जाने के बाद इसे केंद्र सरकार की ओर भेजा जाता है केंद्र द्वारा स्वीकृत किए जाने के बाद महामहिम राष्ट्रपति इसे स्वीकृति प्रदान करते हैं। सीएम केजरीवाल ने अपने ट्विट में लिखा है कि पीएम मोदी और उनकी सरकार ने यह नया नारा दिया है कि वे न तो काम करेंगे और न ही करने देंगे।

आखिर दिल्ली की राज्य सरकार के पास कानून पारित करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। आखिर क्या केंद्र सरकार को दिल्ली के प्रत्येक कानून को रोकने का अधिकार होना चाहिए। केंद्र दिल्ली का हेड मास्टर है मोदी जी से हाथ जोड़कर यह निवेदन है कि थोड़ा बड़ा दिल करें। दिल्ली के लोगों से बदला न लिया जाए।

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