अब ख्वाहिश स्वामी विवेकानंद बनकर स्क्रीन पर आने की

‘अब तक मैंने कई तरह के किरदार निभाए और हरेक की अपनी तासीर थी, अपना मकाम था, लेकिन अब तक मैंने जो किरदार नहीं निभाया या यह कहूं कि अब मैं जो किरदार निभाने की ख्वाहिश रखता हूं वह है ‘स्वामी विवेकानंद’।

उनका पहनावा, बॉडी पोश्चर, विचार, व्यक्तित्व और उनके सिद्धांत मुझे बहुत प्रभावित करते हैं। उनका जीवन बहुत ही दिलचस्प रहा जो मैं अब स्क्रीन पर लाना चाहता हूं। पर अब देखना यह है कि आखिर स्वामी विवेकानंद पर फिल्म कौन बनाता है।’

यह ख्वाहिश है एक ऐसे कलाकार की जिसने थियेटर की दुनिया से लेकर फिल्म इंडस्ट्री और टेलीविजन तक पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। फिर चाहे किरदार सकारात्मक हो या नकारात्मक। यहां बात हो रही है ख्यात कलाकार अनुपम खेर की, जिन्होंने अपनी ख्वाहिश लफ्ज ब लफ्ज कुछ इसी तरह बयां की।

अब वक्त है कुछ देने का

अनुपम खेर अपनी अगली फिल्म ‘रांची डायरीज’ के प्रमोशन के लिए एक्टर हिमांश कोहली, एक्ट्रेस सौंदर्या शर्मा और निर्देशक सात्विक मोहंती के साथ शुक्रवार को शहर आए थे। अनुपम खेर का जिंदगी को लेकर फलसफा बिलकुल साफ है। वे मानते हैं कि मंजिल की राह में अगर रास्ता मुड़ रहा है, तो वह खत्म नहीं हो रहा बल्कि आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है। नवोदित कलाकारों व निर्देशक के साथ बतौर कलाकार व प्रोड्यूसर काम करने की बात पर वे कहते हैं जब तक हमारे जैसे अनुभवी इनका हौसला नहीं बढ़ाएंगे हुनर कैसे बाहर आएगा। जीवन में बहुत कुछ पाया है अब वक्त है कुछ देने का।

राजनीति में नहीं, देश में है दिलचस्पी 

मैं यह मानता हूं कि विलेन बनने से ज्यादा मुश्किल कॉमेडी करना है। असल में कॉमेडी फिजीकल है। चुप रहकर भी आंसु बहाए जा सकते हैं, लेकिन हंसने-हंसाने के लिए तो चुप्पी तोड़नी ही पड़ेगी। जहां तक विलेन बनने की बात है तो आज फिल्म से ज्यादा विलेन आम जिंदगी में नजर आते हैं। अक्सर लोग मुझसे राजनीति में आने की बात पूछते हैं पर मेरी दिलचस्पी राजनीति में नहीं देश में हैं और मैं जो भी बात कहता हूं देश के लिए ही कहता हूं।