अब टाइगर को लगाए जाएंगे कॉलर आईडी, वन विभाग की ये है मंशा

भोपाल। भोपाल से बुदनी के बीच जंगल में घूम रहे बाघ आबादी तक पहुंचकर किसी पर हमला करें, इसके पहले बाघों को कॉलर आईडी लगाकर रोका जाएगा। भोपाल वृत्त के चीफ कंजरवेटर फॉरेस्ट वीके नीमा ने सीहोर की बुदनी रेंज में एक महीने के भीतर बाघ के हमले से दो बच्चों की मौत के बाद यह निर्णय लिया है। अभी किसी भी बाघ को कॉलर आईडी नहीं लगी हैं। इसके कारण पता नहीं लग रहा है कि बच्चों पर हमला किन बाघों ने किया है।

राजधानी से सटे जंगल से लेकर बुदनी तक एक अनुमान के मुताबिक 50 से अधिक बाघ हैं लेकिन वन विभाग की माने तो यह संख्या 35 है। इनमें से दो दर्जन बाघ ऐसे हैं जिनकी होम टेरेटरी (जंगल में घूमने का क्षेत्र) भोपाल के जंगल और रातापानी अभयारण्य से लेकर बुदनी तक है। यानी ये बाघ भोपाल से लेकर बुदनी तक के करीब 60 किमी क्षेत्र में घूम रहे हैं।

इनमें से एक बाघ ने बुदनी रेंज के खंडाबड़ में 23 अक्टूबर को पांचवी की नीतू और दूसरे ने 13 नवंबर को सतकुंडा के पास 12 साल के शेखर पर हमला किया है। दोनों की मौत हो चुकी हैं लेकिन वन विभाग हमला करने वाले बाघों की पहचान नहीं कर पाया है। ऐसे में ये बाघ कब किस पर हमला कर दें, इसका खतरा अभी भी बना हुआ है।

इस संबंध में चीफ कंजरवेटर फॉरेस्ट वीके नीमा का कहना है कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी जितेंद्र अग्रवाल से बाघों को कॉलर आईडी लगाने के प्रस्ताव को अनुमति मिली तो आबादी के आसपास घूमने वाले और बार-बार टेरेटरी बदलने वाले बाघों को कॉलर आईडी लगाकर मॉनीटरिंग करेंगे।

ऐसे काम करेगी ये आईडी

बाघों की लोकेशन पता लगाने के लिए उनके गले में एक बैटरी चलित यंत्र लगाया जाता है जो सिग्नल से जुड़ा होता है। इसकी रेंज 5 से 10 किमी होती है जो रिसीवर व ट्रांसमीटर से सिग्नल देता है। इस आईडी के जरिए चौबीसों घंटे बाघ की लोकेशन पता की जा सकती है। ये आईडी होशंगाबाद के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बार-बार टेरेटरी बदलने वाले बाघों को लगाई गईं थी।

आईडी लगाने के फायदे-नुकसान

फायदेः इसे चिन्हित बाघों को लगाने से उनकी लोकेशन मिलेगी। यानी वे आबादी की तरफ आते हैं तो उन्हें तुरंत रोका जा सकता है।

नुकसानः आईडी लगाने के लिए बाघों को बेहोश करना पड़ता है, जो उसकी जान के लिए खतरा है। आईडी में लगी बैटरी एक से डेढ़ साल तक ही काम करती है उसके बाद डिस्चार्ज हो जाती है। यानी इसे बदलने के लिए बाघों को बार-बार बेहोश करना खतरनाक है।

बाघों की पहचान करने यह तरीका भी अपनाएगा वन विभाग

23 अक्टूबर को जिस बाघ ने नीतू पर हमला किया, उसके फोटो ट्रैप कैमरे में आ गए हैं। 13 नवंबर को शेखर पर हमला करने वाले बाघ का फोटो ट्रैप कैमरे में आते ही दोनों के फोटो का मिलान किया जाएगा। वन्यप्राणी विशेषज्ञ आरके दीक्षित के मुताबिक प्रत्येक बाघ की खाल पर काले रंग की धारियों की बनावट अलग-अलग होती है। इसके आधार पर पहचान की जाती है।