आईएसएस जा रहा सोयूज रॉकेट लॉन्च भार की कमी के कारण फेल

बैकोनूर
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) जा रहे एक सोयूज रॉकेट, जिसमें दो सदस्य सवार थे को आपात स्थिति में उतरना पड़ा। पहले से ही संकट से जूझ रहे रूस के अंतरिक्ष उद्योग के लिए यह एक बड़ा झटका है। अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री निक हेग और रूसी अंतरिक्ष यात्री एलेक्सी ओवचीनिन को कजाकिस्तान + में रॉकेट से सुरक्षित निकाला गया। रॉकेट लॉन्च के असफल होने को लेकर अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं कहा गया है, लेकिन मिशन कंट्रोल से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि शायद भार की कमी के कारण ऐसा हुआ।

रूसी जांच अधिकारियों ने कहा कि वे इस घटना की जांच शुरू कर रहे हैं। देश के सोवियत बाद के इतिहास में ऐसी मानवयुक्त उड़ान में इस तरह की यह पहली घटना है। हाल के वर्षों में रूसी अंतरिक्ष +उद्योग को कई समस्याओं से जूझना पड़ा है। उसे कई उपग्रहों और अन्य अंतरिक्ष यानों का नुकसान उठाना पड़ा है। भार की कमी को तकनीकी खामी के तौर पर ही माना जाता है और जैसे ही मिशन कंट्रोल टीम को इसके संकेत मिले क्रू कैप्सूल के जरिए दोनों अंतरिक्ष सवारों को सुरक्षित निकाल लिया गया।

नासा की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि कजाकिस्तान के दिजेजकजान शहर से 20 किमी. की दूरी पर उतारा गया। नासा अधिकारियों के अनुसार, क्रू सदस्य पूरी तरह से सुरक्षित हैं। क्रू कैप्सूल + की बलिस्टिक लैंडिंग कराई गई। इसका मतलब है कि धरती की तरफ लौटते हुए गति कम थी जिसकी वजह से आपातकालीन लैंडिंग नीचे की तरफ से गिरते हुए कराई गई।

अगर आपके मन में यह प्रश्न आ सकता है कि इस रॉकेट में रूस और अमेरिका के अंतरिक्ष यात्री एक साथ क्या कर रहे थे? इसकी वजह है कि सूयेज ही अभी अकेला रॉकेट है जो स्पेस स्टेशन पर ऐस्ट्रॉनट को भेज सकता है। हालांकि, अमेरिकी कंपनी जैसे बोइंग और एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ऐसे रॉकेट बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।