आपदा में राहत के लिए प्रदेश में तैयार सबसे युवा एसडीआरएफ टीम ने दिखाया दमखम

जयपुर.किसी भी आपदा के वक्त राहत के लिए सबसे अहम जरूरत होती है अत्याधुनिक उपकरणों से लैस एक कुशल प्रशिक्षित नौजवानों वाली टीम की। जो किसी भी वक्त कहीं भी भीषण आपदा में भी जान और माल का नुकसान होने से बचा लें। अब राजस्थान में भी किसी भी आपदा से निपटने के लिए ऐसी ही कुशल 800 जवानों की टीम हमारी सुरक्षा में तैनात रहेगी।

– इस टीम के जवानों ने सोमवार को एसडीआरएफ के झालाना महल जयपुर स्थित मुख्यालय में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, डीजीपी आेपी गलहोत्रा और उच्चाधिकारियों की मौजूदगी में करीब एक घंटे का आपदा में राहत का जीवंत प्रदर्शन कर बताया कि वे किसी तरह किसी प्राकृतिक आपदा, आगजनी या ब्लास्ट के वक्त मुसीबत में फंसे लोगों की जान बचाने में कामयाब होंगे।

पहले बाहर से बुलाई जाते थी बचाव दल टीम, अब राजस्थान में ही तैयार

– इस अवसर पर गृहमंत्री कटारिया ने भी खुशी जाहिर कर एसडीआरएफ के जवानों की मुस्तैदी व दक्ष ट्रेनिंग की तारीफ की। गृहमंत्री कटारिया ने एसडीआरएफ के अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद के लिए बजट आवंटन के लिए मुख्यमंत्री का आभार प्रकट किया। उन्होंने बताया कि अभी एनडीआरएफ की एक यूनिट अजमेर में उपलब्ध रहा करती थी और जरूरत के समय अन्य राज्यों से टीमें बुलवायी जाती थी।

– उन्होंने विश्वास जताया कि अब बाहर से यहां टीम बुलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी बल्कि हमारी टीम अन्य राज्यों में भी जाकर मदद कर सकेंगी। इस अवसर पर महानिदेशक पुलिस ओपी गलहोत्रा ने एसडीआरएफ द्वारा प्रदर्शित डेमो की प्रशंसा की।

महज डेढ़ साल में ट्रेनिंग पूरी कर बनी देश की सबसे युवा एसडीआरएफ टीम
– डीजीपी ओपी गल्होत्रा ने बताया कि महज दो साल में कुशल प्रशिक्षण से तैयार यह देश की सबसे युवा एसडीआरएफ टीम है। वर्ष 2012-13 की बजट घोषणा में राजस्थान में एसडीआरएफ के गठन का निर्णय हुआ था।

– तब वर्ष 2013-14 में 800 कांस्टेबलों की भर्ती दिसंबर, 2015 तक आरएसी कांस्टेबलों के रुप में ट्रेनिंग दी गई। इसके बाद अप्रेल, 2015 तक एसडीआरएफ में 320 पद सुपरविजन और अन्य कार्यों के लिए भर्ती किए गए।

ट्रेनिंग के अभाव में बड़ा सवाल था कि आपदा में जान माल कैसें बचाएंगे

– लेकिन राजस्थान के लोगों को आपदा में तत्काल राहत देकर कैसे जान माल की सुरक्षा की जाएं यह सबसे बड़ा सवाल था। इसकी कमान एडीजी बीएल सोनी को सौंपी गई। जिन्होंने वर्ष 2016-17 में आपदा में राहत के लिए ट्रेनिंग करवाने का काम शुरु किया।

– इसके लिए राजस्थान के 30 जिलों में बिखरे हुए जवानों की 8 कंपनियां बनाई गई। उन्होंने प्रत्येक संभागीय मुख्यालय पर तैनात किया गया। एनडीआरएफ के योग्य ट्रेनरों के अलावा देश के अन्य नामचीन संस्थानों से इन जवानों की ट्रेनिंग करवाई गई। इन्हीं में दक्ष जवानों को चुनकर ट्रेनर और मास्टर ट्रेनर बनाया गया। इस तरह मार्च, 2018 तक यह प्रशिक्षण पूरा हुआ।

आपदा में जान बचाने के लिए 8 संभागों में भेजे 16 ट्रक
– एडीजी एसडीआरएफ बीएल सोनी ने बताया कि प्रदेश में किसी भी तरह की आपदा से निपटने के लिए एसडीआरएफ के जवान अब नए अत्याधुनिक उपकरण के साथ मौजूद रहेंगे। इन बेड़े में 16 ट्रक, 48 बोट, 9 फाइबर बोट्स, कटिंग मशीनें, लाइफ जैकेट्स समेत विभिन्न प्रकार की रोप्स, हेलमेट्स, इमरजेंसी लाइट्स सहित अन्य आवश्यक उपकरण शामिल है।

– गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने हरी झंडी दिखाकर इन 16 ट्रकों को रवाना किया। जो कि प्रदेश के आठ संभागों में मुख्यालय पर भेजे जाएंगे। वहां मौजूद एसडीआरएफ की टीम इनका आपदा की स्थिति में उपयोग कर सकेंगी। इस अवसर पर प्रमुख शासन सचिव आपदा राहत हेमंत कुमार, एडीजी राजीव दासोत, डीसी जैन, राजीव शर्मा, एन नरसिम्हा राव सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।