इंदिरा गाँधी की गलती दोहराने जा रहे थे PM मोदी, अंतिम समय में बदला अपना फैसला।

नई दिल्ली, 15 मई: मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान के द्वारा 11 दिसंबर 2016 को अमरकंटक से प्रारंभ की गई नर्मदा सेवा यात्रा शुरू की गई। इस यात्रा का समापन इसी महीने 15 तारीख यानी सोमवार को होगी। यात्रा समापन के मौके पर कार्यक्रम में शामिल होने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमरकंटक आ रहे हैं। कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर प्रशासन जोर-शोर से लगा हुआ है। वहीं, दूसरी ओर अमरकंटक में हेलीकॉप्टर उतरने से जुड़े मिथक को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है।
बताया जा रहा है कि यहां कोई भी बड़ा राजनेता या मंत्री आदि सीधे अमरकंटक के क्षेत्र में विमान से आसमान में उड़ान नहीं भरते। दरअसल, अमरकंटक में विमान से उतरने से जुड़ी एक मिथक है कि यहां से सीधे उड़ान नहीं भरी जाती। इससे मां नर्मदा की मर्यादा का उल्लंघन होता है। ऐसा माना जाता है कि जिसने भी मां नर्मदा के दामन को विमान से लांघा है उसे अपनी सत्ता गंवानी पड़ी है। बीजेपी के ही कुछ नेताओं का मानना है कि जो भी ऐसा करता है उसका पद नहीं रहता। सत्ता गंवाने वालों में पूर्व पीएम स्व. इंदिरा गांधी और मोरारजी देसाई सहित कई नेता इस सूची में शामिल हैं।
इनके अलावा एमपी के पूर्व मुख्यमंत्रीअर्जुन सिंह मोतीलाल वोरा, उमा भारती, सुंदरलाल पटवा, श्यामाचरण शुक्ल, केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व राष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत और दिग्विजय सिंह शामिल हैं। जानकारों के मुताबिक, यह एक सिद्ध क्षेत्र है और मैकल पर्वत पर से वायुमार्ग से गुजरना अहंकार को दर्शाता है और यह दोष पैदा करता है। यही कारण है कि पीएम मोदी के लिए हैलीपैड को अमरकंटक से करीब 16 किमी. दूर इंदिरा गांधी नेशनल ट्रायबल यूनिवर्सिटी परिसर में बनाया गया है। यहां से पीएम मोदी विशेष कार में बैठकर नर्मदा के उद्गम स्थल और कार्यक्रम स्थल तक जायेंगे।
घटनाओं से जुड़ा मिथक:– इंदिरा गांधी 1982 में हेलिकॉप्टर से अमरकंटक आई थी, जिसके बाद 1984 में उनकी हत्या हो गई। पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत राष्ट्रपति चुनाव से पहले अमरकंटक हेलिकॉप्टर से आए जिसके बाद उन्हें सत्ता गंवानी पड़ी। एमपी के पूर्व सीएम स्व. सुंदरलाल पटवा भी हेलिकॉप्टर से अमरकंटक आए थे, लेकिन उसके बाद उन्हें भी कुर्सी गंवानी पड़ी। उमा भारती भी सीएम रहते हुए 2004 में हेलिकॉप्टर से आई थी जिसके बाद इन्हें भी कुर्सी गंवानी पड़ी। इसके बाद अब जब भी उमा अमरकंटक आती है तो सड़क मार्ग के द्वारा ही आती है

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