इंदौर के एमवायएच में दिसंबर से शुरू होगा बोन मैरो ट्रांसप्लांट

थैलेसीमिया और ब्लड कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए अच्छी खबर है। एक साल इंतजार के बाद एमवाय अस्पताल में दिसंबर तक बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट शुरू हो जाएगी। इसके लिए डोनर का एचएलए (ह्यूमन ल्यूकोसिट एंटिजन) मैचिंग कर रजिस्ट्रेशन भी शुरू होने वाला है। इस सुविधा के बाद महानगरों के निजी अस्पतालों में 15 लाख रुपए खर्च में होने वाला इलाज यहां मुफ्त मिलेगा। शहर और प्रदेश के गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सकेगी।

एमवाय अस्पताल की चौथी मंजिल पर बन रही बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट का काम लगभग पूरा हो गया है। अफसरों का दावा है कि नवंबर के अंत तक यूनिट का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। दिसंबर अंत तक मशीनें लगने के बाद बोन मैरो ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। ऑर्गन डोनेशन सोसायटी द्वारा अस्पताल में डोनर्स का रजिस्ट्रेशन भी शुरू किया जा रहा है। गौरतलब है कि थैलेसीमिया, ब्लड कैंसर सहित रक्त की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों का बोनमैरो ट्रांसप्लांट किया जाता है। मरीज की जिंदगी बचाने के लिए यही एकमात्र रास्ता है।

ज्यादातर केस में रक्त संबंध यानी माता पिता भाई बहन का ही एचएलए मैचिंग होता है। ये मैच नहीं होने पर अन्य रिश्तेदार या परिचितों से लिया जाता है। ऑर्गन डोनेशन सोसायटी के सचिव डॉ. संजय दीक्षित ने बताया कि डोनर्स का एचएलए कर रजिस्ट्रेशन भी जल्द ही शुरू होगा। इससे मरीजों की वेटिंग लिस्ट के साथ साथ डोनर्स की सूची भी अस्पताल के पास रहेगी।

प्रदेश में करीब 1 हजार से ज्यादा थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे और 2 हजार से ज्यादा ब्लड कैंसर वाले मरीजों को बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत है। एमवायएच में यह इलाज पूरी तरह निशुल्क होगा। इससे बड़ी संख्या में गरीब और जरूरतमंद मरीजों को फायदा मिलेगा। मेडिकल कॉलेज की दो डॉक्टरों को बोन मैरो ट्रांसप्लांट का विशेष प्रशिक्षण लेने अमेरिका भेजा गया है।