इनसाइट एयरक्राफ्ट: और गहराई में जाकर मंगल की ‘नब्ज’ जांचेगा रोबॉट

केप केनवेरल
मार्स यानी मंगल पर अपनी पिछली लैंडिंग के 6 साल बाद नासा एक दूसरे मेगा मिशन के लिए पूरी तरह से तैयार है। नासा के इस मिशन में मंगल एक रोबॉटिक भूवैज्ञानिक को भेजा जा रहा है जो अबतक की सबसे अधिक गहराई तक खुदाई कर इस लाल ग्रह के तापमान से जुड़ी और जानकारी जुटाएगा। मार्स के लिए नासा का इनसाइट स्पेसक्राफ्ट इस हफ्ते लॉन्च होने वाला है।

इनसाइट एयरक्राफ्ट पहली बार मंगल की ‘नब्ज’ भी जांचेगा। इसके लिए पहली बार मंगल के भूकंपों (मार्सक्वेक्स) को भी नापा जाएगा। वैज्ञानिक मार्क्स के रोटेशन को ट्रैक कर इस विशाल ग्रह के आकार और इसके कोरों के बारे में और भी जानकारियों जुटाएंगे। इस साल 26 नवंबर को इनसाइट मार्स पर लैंड करेगा और वहां 2 साल बिताएगा।

क्योरिसिटी सहित नासा के पिछले रिसर्च की तरह पानी खोजने की बजाय इनसाइट मंगल की संरचना की स्टडी करेगा। इस मिशन का प्रमुख लक्ष्य मंगल पर आने वाले भूकंपों को पकड़ना और मापना है। ठंडे होने और सिकुड़ने की वजह से मंगल ग्रह पर क्रैक 6 और 7 की तीव्रता के भूकंप पैदा करते हैं। इनसाइट इन भूकंपों की जांच करेगा। इनकी मदद से मंगल की थिकनेस जांचने की कोशिश की जाएगी।

इनसाइट अपने साथ दो सैटलाइट्स भी लेकर जा रहा है। इनमें से एक मंगल के मार्सक्वेक्स की जांच करेगा तो दूसरा तापमान की। तापमान चेक करने के लिए इनसाइट का रोबॉटिक भूवैज्ञानिक मंगल की सतह पर 16 फीट तक खुदाई करेगा। अलग-अलग पॉइंट पर तापमान की जांच की जाएगी।

इस पूरे मिशन की कॉस्ट 814 मिलियन डॉलर है और इनसाइट का वजन 630 किलो है। मंगल ग्रह कई मामलों में पृथ्वी के समान है। दोनों ग्रह पर पहाड़ हैं। हालांकि पृथ्वी की तुलना में इसकी चौड़ाई आधी, भार एक तिहाई और घनत्व 30 फीसदी से कम है।