इस ‘नए रूप’ के साथ टीम इंडिया का गब्बर हो गया है और ज्यादा खूंखार! सबूतों पर निगाह दौड़ा लीजिए!

नई दिल्ली: श्रीलंका में खेली जा रही निसाध टी20 ट्रॉफी में टीम इंडिया के गब्बर शिखर धवन का अलग ही अंदाज  देखने को मिल रहा है. या इसे  शिखर का चिर-परिचित अंदाज भी कह सकते हैं. लेकिन गब्बर का यह नया रूप पहले के मुकाबले थोसा सा ज्यादा बेहपरवाह और आक्रामक दिखाई पड़ रहा है. धीमी पिचों पर भी शिखर धवन की आक्रामकता में कोई कमी नहीं आई है. धवन ने इसका सबूत जारी ट्राई सीरीज के शुरुआती दोनों मैचों में अर्धशतक जड़कर दिया.

शिखर धवन का यह नया टी-20 रूप है, जो गब्बर के रूप में अपनी बल्लेबाजी से मानो यह संदेश देते दिखाई पड़ते हैं कि ‘चुन-चुन कर मारूंगा’..’दौड़ा-दौड़ा कर मारूंगा’. बांग्लादेश के खिलाफ शिखर धवन भले ही थोड़े से धीमे रहे हों, लेकिन श्रीलंका के खिलाफ तो उन्होंने मेजबान गेंदबजों को दौड़ा-दौड़ा कर मारा. थोड़ी बदनसीबी बस यही उनके साथ गई कि वह अपना पहला टी-20 शतक नहीं जमा सके थे. लेकिन पिछले कुछ सालों में धवन की ‘टी-20 की कहानी’ पूरी तरह से उलट थी. अगर भूल गए हैं, तो चलिए हम याद दिला देते हैं

आपको यह जानकर थोड़ा अजीब लगेगा कि साल 2011-17 के बीच शिखर धवन ने टी-20 की 28 पारियों मे 118.30 के स्ट्राइक रेट से 543 रन बनाए. इसमें उनका औसत महज 21.72 का रहा. इस प्रदर्शन में शिखर ने 68 चौकों और 16 छक्कों का सहारा लिया. लेकिन ‘नया गब्बर’ बुरी तरह से आग उगल रहा है. और मानो वह गेंदबाजों को 2020 में होने वाले टी-20 विश्व कप तक झुलसाने के लिए तैयार हैं. चलिए हम ऐसा क्यों कह रहे हैं, इसका सबूत भी आपको दिए देते हैं.

बता दें कि साल 2018 में शिघर धवन ने खेली सिर्फ 5 पारियों में 155.67 के स्ट्राइकरेट और 57.60 के औसत से 288 रन बना डाले हैं. इसके लिए अभी तक धवन 27 चौके और 12 छक्के लगा चुके हैं. अगर आप उनके टी-20 में पिछले छह साल के प्रदर्शन से तुलना करेंगे, तो पाएंगे हर बात में बहुत ज्यादा सुधार हुआ है. लेकिन सबसे बड़ा सुधार यह है कि यह गब्बर अब हवा में ज्यादा बातें करने लगा है. कहां 28 पारियों में 16 छक्के और कहां सिर्फ 5 पारियों में ही 12 छक्के…तो गेंदबाजों सावधान हो जाओ. यह गब्बर और ज्यादा खूंखार हो गया है