इस १ मंत्र को ध्यान रखने से ज़िन्दगी में चमत्कारी बदलाब होंगे

हर व्यक्ति में कोई न कोई गुण जरूर होता है, लेकिन दूसरों के गुणों से इतने अधिक प्रभावित हो जाते हैं कि खुद में छिपी काबिलियत को देख ही नहीं पाते। अक्सर दूसरों के जैसे बनने के चक्कर में न तो उनके जैसा बन पाते हैं  और न अपने गुणों से लोगों को प्रभावित कर पाते हैं। जबकि ईश्वर सभी व्यक्ति के अलग-अलग तरह के काम करवाना चाहता है ‌इसीलिए उसने सभी को अलग अलग गुण दिए हैं। जिसे व्यक्ति समय से पहचान कर विकसित कर लें तो उन्हें भी इस पेड़ की तरह खुशहाल होने से कोई नहीं रोक पाएगा और यही कामयाबी का भी मंत्र है। एक राजा अपने बगीचे में सैर करने गया। उसने देखा कि सारे पेड़-पौधे मुरझाए हुए थे। वह बहुत चिंतित हुआ, उसने सभी पेड़-पौधों से एक-एक करके सवाल पूछे। ओक वृक्ष ने कहा कि मैं देवदार जितना लंबा नहीं हो पा रहा।  राजा ने देवदार की ओर देखा तो उसके भी कंधे झुके हुए थे।उसे अपने आप से शिकायत थी कि वह अंगूर लता की तरह फल नहीं दे सकता। अंगूर लता इसलिए मायूस थी कि वह गुलाब की तरह खिल नहीं पाती थी। राजा ‌की नजर एक पेड़ पर पड़ी, जो निश्चिंत था, खिला हुआ और ताजगी में नहाया हुआ था। राजा ने उसे देखकर कहा कि अजीब बात है। एक से बढ़कर एक ताकतवर पेड़ दुःखी हैं, लेकिन तुम इतने खुश नजर आ रहे हो, आखिर इसका क्या राज है? उस पेड़ ने कहा महाराज, बाकी पेड़ अपनी विशेषता देखने की बजाय स्वयं की दूसरों से तुलना करके दुःखी हैं। जब आपने मुझे इस बाग में रोपित कराया था, तब आपने यही चाहा होगा कि मैं अपने गुणों से इस बगीचे को सुंदर बनाऊं। यदि आप इस स्थान पर ओक, अंगूर या गुलाब चाहते तो उन्हें लगवाते। मुझे क्यों पूछते। इसीलिए मैं किसी और की तरह बनने की बजाय अपनी क्षमता के अनुसार श्रेष्ठतम बनने का प्रयास करता हूं और प्रसन्न रहता हूं।