एड्स पीड़ितों के बनेंगे खास राशन कार्ड, मिलेगा 35 किलो चावल

एड्स पीड़ित परिवार के लिए राहत भरी खबर है। उनके लिए खास राशन कार्ड बनेगा और महीने में 35 किलो चावल मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग ने 24 एड्स पीड़ितों को इसके लिए चिन्हांकित किया है। एड्स पीड़ितों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के मकसद से इस तरह की सुविधा शुरू की जा रही है।

जिले में एचआईवी और एड्स पीड़ितों के उपचार के लिए जिला अस्पताल में एआरटी सेंटर खोला गया है। इस सेंटर में उस पैमाने पर एचआईवी और एड्स पीड़ित इलाज कराने नहीं आते, जितनी वास्तविक संख्या है।

डॉक्टरों के मुताबिक एचआईवी जब एड्स का रूप ले लेता है तो मरीज की प्रतिरोधक क्षमता काफी कम हो जाती है और उसे यह लगने लगता है कि वह ठीक नहीं हो पाएगा। इस तरह वह इलाज अधूरा छोड़कर भी चला जाता है।

एचआईवी और एड्स पीड़ितों को सरकार समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए अब उन्हें एक रूपए के हिसाब से 35 किलो प्रति महीने चावल देने का फैसला लिया है। शक्कर और मुफ्त नमक भी अन्य हितग्राहियों की भांति मिलेगा।

आंकड़े बोल रहे कि इलाज कराने नहीं आते

विभागीय आंकड़े ही इस बात के गवाह है कि पूरे पीड़ित इलाज नहीं कराते। जिले में वर्ष 2010-11 से अगस्त 2017 तक 3340 एचआईवी पीड़ित मिले है। इनमें से 2765 एचआईवी पीड़ित ही एआरटी सेंटर में इलाज करवाने के लिए रजिस्टर्ड हुए है। बाकी पीड़ितों ने रजिस्ट्रेशन ही नहीं करवाया। गंभीर बात यह है कि रिपोर्ट पॉजीटिव आने के बाद ये चले जाते है।

इसलिए बनवाया जा रहा है राशन कार्ड

विभागीय सूत्रों के मुताबिक एचआईवी और एड्स पीड़ितों की संख्या ज्यादा है, लेकिन वे अपनी बीमारी लोगों में उजागर न हो इसलिए इलाज के लिए नहीं आते। इसका नतीजा यह होता है कि वे अपनी बीमारी जाने-अनजाने में दूसरों को भी दे सकते हैं।

सरकार एचआईवी और एड्स की रोकथाम करने के लिए हर साल करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन उसके बाद भी मरीज बढ़ रहे है। राशन देने की योजना शुरू करने से ऐसा माना जा रहा है कि पीड़ित अपनी बीमारी नहीं छिपाएंगे और इलाज कराने सामने आएंगे। सरकार की इस योजना के बाद मरीज अपने परिवार की व्यवस्था के लिए भी पहल करेंगे।

– एड्स पीड़ितों को सरकार अन्य हितग्राहियों की तरह खाद्यान वितरण योजना से जोड़ा है। उन्हें 35 किलो चावल, शक्कर व मुफ्त नमक हर महीने मिलेगा। चिन्हांकित मरीजों की सूची राशन कार्ड बनवाने के लिए खाद्य विभाग को दे दी गई है। – डॉ. सुभाष पांडेय, सीएमएचओ, दुर्ग