एमपी सरकार ने माना, पुलिस फायरिंग में हुई किसानों की मौत

मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने दो दिन बाद आज बृहस्पतिवार को आखिरकार स्वीकार कर लिया कि मंदसौर में किसानों की मौत पुलिस फायरिंग से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी यह साफ हुआ है कि किसानों को गोली छाती व गर्दन में मारी गई थी। शरीर के इन दोनों हिस्सों में गोलियों के निशान मिले हैं।
सूत्रों का कहना है कि पुलिस और सीआरपीएफ दोनों ने फायरिंग की थी। दोनों की गोलियों से किसान मारे गए। इस बीच सरकार ने आज मंदसौर के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को हटा दिया और दोनों पदों पर नई पोस्टिंग कर दी। इतना ही नहीं नीमच व रतलाम के कलेक्टर भी बदले गए हैं। फायरिंग के बाद गुस्साए किसानों को शांत करने के लिए ऐसा किया गया है। उधर मंदसौर में एक टोल नाके पर तोड़फोड़ को छोड़कर हालात तनावपूर्ण लेकिन काबू में रहे। प्रदेश के अन्य इलाकों से भी हिंसा की खबरें नहीं हैं।
मंगलवार को प्रदेश के गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा था कि पुलिस की गोली से किसानों की मौत नहीं हुई, लेकिन आज वह अपने इस बयान से पलट गए और कहा कि उन्होंने प्रारंभिक सूचना के आधार पर पुलिस फायरिंग से इनकार किया था। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी माना कि मंदसौर में प्रशासन ने जिम्मेदारी से काम नहीं किया, इसीलिए कलेक्टर व एसपी को हटाया गया है।

उधर राज्य के मुख्यसचिव बीपी सिंह ने कहा कि मंदसौर के डीएम व एसपी को सजा देने के मकसद से नहीं हटाया है, बल्कि वापस बुलाया गया है ताकि स्थानीय लोगों के गुस्से को शांत किया जा सके। उन्होंने कहा कि नए अधिकारी बगैर किसी बोझ के काम करेंगे तो नतीजे अच्छे आएंगे। गौरतलब है कि मंदसौर में स्वतंत्र कुमार सिंह की जगह ओपी श्रीवास्तव कलेक्टर और ओपी त्रिपाठी के स्थान पर मनोज कुमार सिंह एसपी नियुक्त किए गए हैं। कौशलेन्द्र सिंह को नीमच और तन्वी सुन्द्रियाल को रतलाम कलेक्टर बनाया गया है।