कठुआ गैंगरेप केस: बच्ची के पिता की सुप्रीम कोर्ट से अपील, मुकदमा जम्मू-कश्मीर के बाहर चलाया जाए

नई दिल्ली/जम्मू.सामूहिक दुष्कर्म के बाद 8 साल की बच्ची की हत्या के आठ आरोपियों के खिलाफ जिला और सत्र न्यायालय में सुनवाई शुरू हो गई है। सभी आरोपियों को सोमवार सुबह कोर्ट में पेश किया गया। इनमें से एक आरोपी ने कहा कि नॉर्को टेस्ट में सब कुछ साफ हो जाएगा। इससे पहले, बच्ची के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर केस की सुनवाई जम्मू-कश्मीर के बाहर कराने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दोपहर को सुनवाई करेगा। वहीं, बच्ची के परिजनों की वकील दीपिका एस राजावत ने धमकियां मिलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि मैं कब तक जिंदा रहूंगी। मेरे साथ दुष्कर्म हो सकता है, मेरी हत्या भी हो सकती है। मुझे कल धमकी मिली थी कि तुम्हें माफ नहीं करेंगे।’

अगली सुनवाई 28 अप्रैल को

– आरोपियों के वकील अंकुर शर्मा ने कहा कि कोर्ट ने सभी आरोपियों को चार्जशीट की कॉपी मुहैया कराने के आदेश दिए हैं। वहीं, अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी।

मुस्लिम का केस लड़ने पर हिंदू विरोधी कहा जा रहा

– राजावत ने आगे कहा, ”मुझे उन्होंने (बार एसोसिएशन के वकील) अलग-थलग कर दिया है। कोर्ट में प्रैक्टिस करने तक से रोका जा रहा है। मैं नहीं जानती कि आगे कैसे गुजारा करूंगी। मुस्लिम लड़की के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ने पर मुझे हिंदू विरोधी कहकर समाज से निकालने की बातें हो रही हैं।”

बीसीआई का पैनल वकीलों से जुड़े विवाद की जांच करेगा

– उधर, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने कहा है कि वकीलों से जुड़े विवाद की जांच के लिए काउंसिल ने एक पैनल बनाया है। जम्मू-कश्मीर बार एसोसिएशन के वकीलों पर आरोपियों का सपोर्ट करने का आरोप है। जिन्होंने 10 अप्रैल को पुलिस को चार्जशीट पेश करने से रोका था।

सरकार ने सिख समुदाय के वकील नियुक्त किए

– बता दें कि आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के आरोपियों में एक नाबालिग भी है। एसआईटी ने उसके खिलाफ अलग चार्जशीट दाखिल की है। नियमों के तहत कठुआ के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सात आरोपियों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट सेशंस कोर्ट भेजेंगे। वहीं, नाबालिग के खिलाफ उन्हीं के कोर्ट में सुनवाई चलेगी।

– इस संवेदनशील केस के हिंदू-मुस्लिम का रंग लेते देख महबूबा सरकार ने पैरवी के लिए सिख समुदाय के दो स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर नियुक्त किए हैं।

आरोपी के परिवार ने कहा- सीबीआई से जांच करवाओ, फिर सरेआम फांसी दे देना

कठुआ कांड का मुख्य साजिशकर्ता बताए जा रहे सांझी राम के परिवार ने कहा है कि मामले की जांच सीबीआई से करवानी चाहिए। उसमें दोषी मिलने पर भले ही सांझी राम और उसके बेटे को सरेआम फांसी दे देना। भूख हड़ताल पर बैठी सांझी राम की बेटी ने कहा कि बच्ची को न्याय दिलाने के लिए सीबीआई जांच की मांग को मीडिया दोषियों को बचाने अौर जांच में रुकावट डालने की कोशिश क्यों दिखा रहा है।

भाजपा के दोनों मंत्रियों के इस्तीफे सीएम ने किए मंजूर

– राज्यपाल को भेजे दुष्कर्म के आरोपियों के समर्थन में हुई रैली में जाकर विवादों में घिरे भाजपा के दोनों मंत्रियों के इस्तीफे मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने रविवार को मंजूर कर लिए। राज्य सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि मंत्री लाल सिंह और चंद्र प्रकाश गंगा के इस्तीफे भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सत शर्मा ने सीएम को भेजे थे। इन्हें तत्काल मंजूर कर राज्यपाल एनएन वोहरा के पास भेज दिया गया।

क्या है मामला?

– कठुआ जिले के रासना गांव में अल्पसंख्यक बकरवाल समुदाय की 8 साल की बच्ची से जनवरी में बंधक बनाकर कई दिनों तक गैंगरेप किया गया। बाद में उसकी बेरहमी से हत्या कर दी।
– गांव में स्थित एक मंदिर के 60 साल का सेवादार सांझी राम समेत 8 लोग आरोपी हैं। सभी को गिरफ्तार किया जा चुका है।
– 10 अप्रैल को इस मामले में चार्जशीट दाखिल की गई। तब वकीलों ने पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने से रोका। इसके बाद ही इस मामले ने तूल पकड़ा।