कमाई के अपनाइए ये तरीके…सेविंग अकाउंट से ज्यादा होगा फायदा

अगर आप अपनी आय बढ़ाना चाहते है और पैसे निवेश करने के ढ़ूढ रहे है तो परेशान मत होइए। हम आपको बता रहे है कुछ ऐसे तरीके जिनसे आप कम निवेश में ही अधिक फायदा ले सकते है। इसके साथ ही बचत खाते से आपको ज्यादा फायदा मिलेगा।

जानकारों का कहना है कि सेलरी का पैसा अगर बैंक खाते की जगह लिक्विड फंड में रखेंगे तो आपको हर दिन के हिसाब से ज्यादा ब्याज मिलेगा और सलेरी से बची रकम पर भी आप सेविंग अकाउंट से ज्यादा ब्याज ले सकेंगे।

अमूमन महीने के पहले हफ्ते में आई सेलरी का नौकरी पेशा पूरे महीने छोटे-छोटे हिस्सो में खर्च करते है। जैसे मकान का किराया, गाड़ी की ईएएमआई,राशन,घूमना आदि। लेकिन अगर आप इन खर्चो के साथ ही कुछ बचत कर कुछ पैसे लिक्विड फंड में ट्रांसफर कर ले तो आपको ज्यादा फायदा होगा।

क्या होते हैं लिक्वड फंडः लिक्विड फंड म्यूचुअल फंड्स का ही एक प्रकार हैं। इसका पैसा गवर्नमेंट सिक्योरिटीज, सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट, ट्रेजरी बिल्स, कॉमर्शियल पेपर्स और दूसरे डेट इंस्टूमेंट्स में निवेश किया जाता है। इन फंड्स की मैच्योरिटी 91 दिनों तक होती है और सरकारी विकल्पों में निवेश करने के कारण इनमें जोखिम की मात्रा न के बराबर होती है।

लिक्विड फंड के फायदेः बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर आप अपनी आय बढ़ाने के लिए यह विकल्प काफी अच्छा है। आप इसमें 1 दिन या 3 महीने और 7 दिन से 3 महीने के लिए निवेश कर सकते हैं। आजकल कुछ बैंक लिक्विड फंड के लिए एटीएम भी उपलब्ध करवाते हैं। उन्होंने कहा कि युवा अमूमन अपनी सैलरी का 25 से 30 फीसदी तक हिस्सा बचा लेते हैं। वहीं किसी सूरत में आप अगर मात्र 10 फीसद हिस्सा बचाने की स्थिति में ही हैं तो आप इतने का भी निवेश कर सकते हैं। बीते 6 से 7 सालों के दौरान लिक्विड फंड ने 7 से 8 फीसद तक का रिटर्न दिया है। सामान्य तौर पर आप इससे 5 से 6 फीसद तक के रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं। कुछ कुछ सालों में लिक्विड फंड ने 9 फीसद तक का रिटर्न भी दिया है लेकिन यह पूरी तरह से ब्याज दरों में निर्भर करता है।

ऐसे करें सैलरी का मैनेजमेंटः निवेश और टैक्स एक्सपर्टो का कहना है कि अगर आप नौकरीपेशा हैं तो किसी भी निवेश का फैसला सोच समझकर लेना चाहिए। मान लीजिए आपकी इन हैंड सैलरी 30,000 रुपए है तो आपको इसका 20 फीसद हिस्सा निवेश के लिए अलग कर लेना चाहिए। यानी कि 6,000 रुपए। जैसा कि आपकी सैलरी का 50 फीसद हिस्सा तय खर्चों के लिए होता है जिन्हें आप टाल नहीं सकते हैं, मसलन घर का किराया, राशन, फोन बिल, बधाों की फीस इत्यादि। वहीं सैलरी का 30 फीसदी हिस्सा अनचाहे खर्चों के लिए होता है। हालांकि आप इनके बिना भी काम चला सकते हैं। जैसे कि नया टीवी खरीदना, फिल्म देखना या फिर छुट्टियां मनाने के लिए बाहर जाना। वहीं आपकी सैलरी का 20 फीसद हिस्सा निवेश किए जाने की स्थिति में होता है। ऐसे में आप इसे लिक्विड फंड में निवेश कर सकते हैं।