कम्प्यूटर आने के बाद भी बही-खातों का बना हुआ है क्रेज

दीपावली के दिन बही-खाता लिखने का काम आज भी व्यापारी उसी तरह करते हैं, जैसे सालों पहले किया जाता था। कम्प्यूटर, लेजर डायरी, बिल डायरी आने के बाद भी बही लिखने की परंपरा कायम है। साथ ही व्यापार में विस्तार के विश्वास के साथ शहर के पांच हजार से ज्यादा व्यापारी दीपावली पर इनका पूजन करेंगे।

जीएसटी सॉफ्टवेयर, लेजर डायरी व कम्प्यूटर के आने के बाद भी बही-खातों का क्रेज सराफा, बर्तन व्यापारी, कपड़ा, अनाज सहित अन्य व्यापारियों में बरकरार है। सराफा व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी ने बताया खाता-बही में बसना को शुभ माना गया है, जिसे हम लाल स्याही से बही पर लिखते हैं।

बाजार से इसका पूरा सेट ऑर्डर देकर बुलवाया है। एक से दो हजार रुपए में यह पूरी बही खरीदी गई है, जिसका दीपावली पर शुभ मुहूर्त पर पूजन किया जाएगा।

दो-तीन साल तक रखते हैं संभालकर

दीपावली के दिन पूजन कर हर व्यापारी इसे दो-तीन साल तक संभालकर रखते हैं। वहीं विशेष अवसरों पर इसका पूजन भी किया जाता है। इसमें अपने ग्राहकों से लेनदेन की जानकारी लिखी होती है। घर में ही पूजन स्थान या दुकान में इसे रखा जाता है।

शुभ मुहूर्त में पूजन शुभ

ज्योतिषाचार्य ओम वशिष्ठ ने बताया शुभ मुहूर्त में इसके पूजन से लक्ष्मी प्राप्त होती है। इसीलिए हर व्यापारी इसका पूजन करता है। कई सॉफ्टवेयर व कम्प्यूटर के आने के बाद भी बही-खाते पर शुभ-लाभ लिखकर ही पूजन किया जाता है।

दीपावली से नया साल, इसलिए महत्व

बर्तन व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र मेहता ने बताया बही लिखना भारतीय परंपरा है। पूर्वज इसे लिखते आ रहे हैं। इसी परंपरा को हम भी बनाए हुए हैं। व्यापारियों का नया साल दीपावली से ही प्रारंभ होता है, इसीलिए सभी व्यापारी इसका पूजन करते हैं।