कैंसर के इलाज के लिए निजी अस्पताल नहीं ले पाएंगे ज्यादा राशि

कैंसर के इलाज में निजी अस्पताल अब मनमाना पैसा नहीं ले पाएंगे। सरकार द्वारा दी गई राशि में से उन्हें एक-एक पैसे का हिसाब देना होगा। मरीज की भर्ती से लेकर फालोअप तक कौन कौन सी जांचें कराई गईं,किस वार्ड में भर्ती किया गया, किस मशीन से रेडियोथैरेपी दी। यह सब बताना होगा।

सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) में इन सभी के रेट तय हैं। इसी के आधार पर इलाज का पैकेज तैयार किया जाएगा। अभी निजी अस्पताल कैंसर के इलाज के लिए एकमुश्त पैकेज बनाते हैं, जिसमें गड़बड़ी की आशंका रहती है।

राज्य बीमारी सहायता निधि के तहत गरीब मरीजों का इलाज चिन्हित अस्पतालों में किया जाता है। इसी तरह से सरकारी कर्मचारियों व मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान के तहत भी चिन्हित निजी अस्पतालों में कैंसर का इलाज किया जाता है।

अभी कैंसर के इलाज के लिए राज्य सरकार ने अधिकतम सहायता राशि की सीमा तो तय की है, लेकिन इलाज में विभिन्न् स्तर पर होने वाले खर्च का ब्यौरा नहीं लिया जाता। इसका फायदा उठाकर निजी अस्पताल एकमुश्त पैकेज तैयार कर शासन से राशि से ले लेते थे।

सूत्रों के मुताबिक यह राशि करीब 40 फीसदी ज्यादा होती है। अब इस पर सख्ती होने जा रही है। इलाज में होने वाले छोटा से छोटा खर्च भी निजी अस्पतालों को बताना होगा। सीजीएचएस द्वारा तय रेट से इन खर्चाें को जोड़कर पैकेज बनाया जाएगा।

इसलिए पड़ी जरूरत

करीब तीन साल पहले इंदौर के एक निजी अस्पताल ने कैंसर के मरीज के इलाज के लिए शासन से डेढ़ लाख रुपए लिए। बीच में पैसा खत्म होने का हवाला देकर मरीज का बीच में इलाज बंद कर दिया गया। स्वास्थ्य संचालक डॉ.के एल साहू ने बताया जब अस्पताल प्रबंधन से हिसाब मांगा गया तो पता चला कि मरीज को प्राइवेट वार्ड में भर्ती किया गया था। करीब 50 हजार रुपए बिल वार्ड का हो गया। इसकी वजह यह कि पैकेज में यह साफ नहीं था कि मरीज को कहां भर्ती करना है।

यह बताना होगा

– ओपीडी फीस

-जांच कौन सी होंगी और किस लैब व मेथड से होंगी

– मरीज को कहां भर्ती किया जाएगा।

– सर्जरी कौन डॉक्टर करेगा और उसका क्या चार्ज होगा।

– मरीज को कितने दिन अस्पताल में रख्ाना पड़ेगा।

– रेडियोथैरेपी कौन सी दी जाएगी, किस मशीन से और कितने साइकिल देना होगी।

– कीमोथैरेपी के लिए कौन दवा लगेगी।

-मरीज को फालोअप के लिए कितनी बार आना होगा।

मरीज को यह होगा फायदा

अभी कई बार निजी अस्पताल पैसा खर्च होने की बात कर मरीज को बीच में इलाज से मना कर देते हैं। पहले से सब कुछ तय रहेगा तो इलाज से मना नहीं कर पाएंगे न ही मरीजों से फालोअप अन्य तरह के खर्च के लिए अतिरिक्त पैसा मांग सकेंगे। मरीज को भी यह पता होगा कि शासन से किन प्रक्रियाओं के लिए उसे सहायता राशि मिली है।

इनका कहना है

कैंसर के इलाज का पैकेज संशोधित किया जा रहा है। हर प्रोसीजर व खर्च के बारे में बताना होगा। इसी आधार पर निजी अस्पतालों को भुगतान किया जाएगा।

डॉ. के एल साहू संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं