कौन हैं राजेंद्र कुमार और क्या हैं उन पर आरोप

दिल्ली में मंगलवार को राजनीति एक बार फिर गरमा गई है क्योंकि सीबीआई ने दिल्ली सरकार के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के दफ्तर और घर पर छापा मारा है। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि उसके पास उनके खिलाफ भ्रष्टाचार में लिप्त होने के पुख्ता सबूत हैं।

इसी को लेकर दिल्ली सीएम व आम आदमी पार्टी सीधे केंद्र सरकार व पीएम मोदी पर हमला बोल रही है और इसे दुर्भावना की कार्रवाई बता रही है। इसके साथ ही आम आदमी पार्टी ये भी कह रही है कि राजेंद्र पर ये कार्रवाई इसलिए की गई है क्योंकि वो केजरीवाल के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

आम आदमी पार्टी उन्हें एक सच्चा और ईमानदार व्यक्ति बता रही है और इस छापे को केजरीवाल के साथ काम करने की सजा बता रही है। हालांकि राजेंद्र पहली बार सुर्खियों में नहीं हैं। वो इससे पहले भी कई बार चर्चा का विषय बन चुके हैं। आइए हम आपको उनसे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं।

पद का किया दुरुपयोग

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राजेंद्र कुमार 1989 बैच के आईएएस अफसर हैं। वो इस साल फरवरी में दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद सीएम केजरीवाल के प्रधान सचिव के तौर पर नियुक्त किए गए थे। बता दें कि राजेंद्र पिछली आप सरकार में भी ‌केजरीवाल के सचिव थे।

केजरीवाल की ही तरह वो भी एक आईआईटी छात्र हैं। उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से पढ़ाई की थी। सीएम के सचिव होने के साथ-साथ राजेंद्र शरही विकास विभाग और बिजली व ट्रांसपोर्ट समेत कई विभागों के सचिव थे। बता दें कि राजेंद्र को दिल्ली सरकार का प्रधान सचिव बनाए जाने पर भी काफी बवाल हुआ था।

राजेंद्र कुमार के घर और दफ्तर पर मंगलवार को पड़ा सीबीआई का छापा उनके भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने की वजह से है। उनपर आरोप है कि वो पिछले पांच सालों में जिस भी पद पर आसीन रहे उसका फायदा उठाते हुए उन्होंने निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया।

कंपनियां बनाकर पीएसयू से जोड़ा, सरकार को हुआ बड़ा घाटा

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वरिष्ठ अफसरशाह आशीष जोशी भी एसीबी प्रमुख एमके मीणा को राजेंद्र कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार में लिप्त होने की शिकायत देते हुए जांच करने की गुहार लगा चुके हैं।
जोशी पहले दिल्ली डायलॉग कमीशन के सदस्य थे जिन्हें बाद में हटा दिया गया था।

उन्होंनेने राजेंद्र पर आरोप लगाया था कि जब वो दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग, आईटी और स्वास्थ विभाग में थे उस वक्त उन्होंने अपने पद का गलत उपयोग किया। इसलिए उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए।

जोशी का आरोप था कि राजेंद्र ने शिक्षा निदेशक(मई 2002 से लेकर फरवरी 2005) और बाद में सचिव (आईटी व स्वास्थ्य) रहते हुए कई कंपनियां स्थापित कीं जिनका काम बिना टेंडर के ही संब‌ंधित विभागों के काम पा जाती थीं। जिसकी वजह से दिल्ली सरकार को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

सीएनजी फिटनेस स्कैम में भी फंसे हैं राजेंद्र

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एसीबी ने इस शिकायत के मिलने के बाद ये केस सीबीआई को सौंप दिया था और जुलाई 2015 से ही माना जा रहा था कि राजेंद्र सीबीआई की जद में आ सकते हैं। इसके साथ ही राजेंद्र सीएनजी फिटनेस मामले में भी आरोपी है।

गौरतलब है कि राजेंद्र ने कुछ लोगों के साथ मिलकर एंडेवर सिस्टम्स प्रा. लि. नाम की कंपनी बनाई। 2007 में वो दिल्ली सरकार में आईटी सचिव के पद पर बैठे।

इस दौरान उन्होंने अपनी कंपनी को पब्लिक सेक्टर यूनिट(पीएसयू) आईसीएसआईएल के साथ जोड़ दिया। आईसीएसआईएल एक पीएसयू है। जोशी का आरोप है कि पीएसयू से जुड़ने के बाद राजेंद्र की कंपनी बिना टेंडर के ही सरकारी विभागों के काम कर सकती थी।

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