क्‍या चीन को देख भारत ने म्यांमार में बुनियादी परियोजनाओं की गति बढ़ाई

भारत त्रिपक्षीय राजमार्ग या भारत-म्यांमार-थाईलैंड राजमार्ग का भी निर्माण कर रहा है, जो मूल रूप से 2014 के लिए लक्षित था। लेकिन अब यह 2020 तक ही पूरा हो पाएगा।

नई दिल्‍ली, जेएनएन। भारत, म्‍यांमार में चीन से काफी पिछड़ रहा है। म्‍यांमार में कई प्रोजेक्‍ट ऐसे हैं जिनकी डेडलाइन बीत चुकी है, लेकिन भारत ने अभी तक इन्‍हें पूरा नहीं किया है। उधर चीन, म्‍यांमार में बड़ी तेजी से अपने प्रोजेक्‍ट पूरे करने में जुटा हुआ है। ऐसे में भारत ने म्‍यांमार में अपनी बुनियादी ढांचा प्रतिबद्धताओं को गति देने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। भारत के प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन में सुस्ती से उसकी प्रतिष्ठा पर सवाल खड़ा हो सकता है, फिर भले ही भारत ने म्यांमार को 1.75 बिलियन डॉलर से ज्यादा अनुदान और क्रेडिट दिया हो।
एक स्‍थानीय अखबार को दिए बयान में म्यांमार में भारतीय राजदूत विक्रम मिसरी ने कहा कि भारत ने सित्‍तवे पावर के लिए इमारत और पेलेट्टवा में अंतर्देशीय जल टर्मिनल का निर्माण पूरा कर लिया है। उन्होंने कहा, ‘पेलेट्टवा में एक सड़क है जिसे ज़ोरिनपूई नामक एक बिंदु तक बनाया जाएगा, यह मिजोरम की सीमा के किनारे है। हमने इसके लिए अंतिम चरण के लिए अनुबंध किया है। इस परिवहन गलियारे का निर्माण जब पूरा हो जाएगा तो इसमें रखिना और चेन जैसे राज्यों में आर्थिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता है, जिससे होकर यह गुजरेगा। इस प्रोजेक्‍ट के अक्टूबर में शुरू होने की उम्मीद है। 109 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण के लिए 1600 करोड़ रुपये का अनुबंध किया गया है।

भारत त्रिपक्षीय राजमार्ग या भारत-म्यांमार-थाईलैंड राजमार्ग का भी निर्माण कर रहा है, जो मूल रूप से 2014 के लिए लक्षित था। लेकिन अब यह 2020 तक ही पूरा हो पाएगा। मिसरी ने बताया कि इस प्रोजेक्‍ट पर काम चल रहा है। हम तमु-कलय रोड पर 69 पुलों की मरम्मत कर रहे हैं और राजमार्ग के कलयवा-यगी सेक्शन का निर्माण भी कर रहे हैं। चिन राज्य में जो भारत के मिजोरम की सीमाओं के किनारे स्थित हैं में भी हम एक सड़क का निर्माण कर रहे हैं।

इधर केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आइजोल, मिजोरम में भारत-म्यांमार सीमावर्ती राज्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि नॉर्थ ईस्‍ट में विकास की गति को तेज करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। अन्तर्राज्यीय सड़क निर्माण, पूर्वोत्तर के शहरों को सड़क व हवाई मार्गों से जोड़ना, ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य और विभिन्न क्षेत्रों में शोध तथा उच्च स्तरीय संस्थानों की स्थापना के साथ आधारभूत संरचना के विकास पर विशेष बल दिया गया है।\