खाना बनाते समय सिलेंडर फटने से मकान की छत उड़ी 7 झुलसे, 2 की हालत गंभीर

रायपुर।पंडरी के ताजनगर में शनिवार सुबह खाना बनाते समय सिलेंडर फटने से सात लोग झुलस गए। इनमें से दो की हालत गंभीर है। धमाका इतना तेज था कि आसपास घरों में सो रहे लाेगों की अचानक नींद खुल गई। यही नहीं, सिलेंडर के धमाके से मकान की शीट उड़ गई और दीवार में क्रेक आ गया। घायलों का इलाज देवेंद्रनगर स्थित एक निजी अस्पताल में चल रहा है।
– ताजनगर में सुबह 7.30 बजे मो. जहांगीर के मकान में जोर का धमाका हुआ। किसी को समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है? कुछ देर बाद पता चला कि उसके किराएदार के घर में सिलेंडर फटा है। सिलेंडर को बुझाने के प्रयास में छह लोग झुलस गए। इसमें एक कमरे में रहने वाले अजमल व एसके इनाम 30 फीसदी तक झुलस गए।
– मोहम्मद होजाजुद्दीन 15 फीसदी झुलस गया। आनन-फानन में सभी को बाइक, ऑटो व एंबुलेंस से अंबेडकर अस्पताल पहुंचाया गया। परिजनों का आरोप है कि पर्याप्त इलाज नहीं मिलने पर मरीजों को देवेंद्रनगर स्थित नारायणा अस्पताल ले जाया गया।
– अस्पताल के डायरेक्टर डाॅ. सुनील खेमका ने बताया कि झुलसे हुए लोगों को बर्न यूनिट में रखा गया है। दो लोग 30 फीसदी तक झुलसे हैं। सिर, गला, हाथ व पैर झुलस गए हैं। तीन लोगों को ओपीडी में इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि घायलों की हालत खतरे से बाहर है।
– जहांगीर ने बताया कि जब धमाका हुआ तो वह सो रहा था। जिस घर में सिलेंडर फटा, वहां तीन किराएदार रहते हैं। उसके बगल वाले घर में वह रहता है। झुलसे हुए लोग अलग-अलग कमरों में रहते हैं।
केवल चार किलोग्राम का था सिलेंडर
– पुलिस व घर वालों के अनुसार जो सिलेंडर घर में फटा है, वह केवल चार किलोग्राम का था। खाना बनाने के दौरान यह भभका आैर फट गया। अजमल व बाकी झुलसे लोग मार्बल लगाने का काम करते हैं। काम में जल्दी जाने के कारण सुबह खाना बना रहा था।
– घटना में सामान्य रूप से झुलसे मो. इंतकाब ने बताया कि वह और उसका जीजा अजमल मूलरूप से बिहार के रहने वाले हैं। तीन महीने पहले ही इस घर में किराया से रहने आए हैं। उन्होंने बताया कि कम सदस्य रहने के कारण छोटा सिलेंडर उपयाेग करते हैं।
– सिलेंडर का उपयोग 15 दिन किया जा चुका था। इसके बावजूद जोर का धमाका हुआ। उन्होंने बताया कि धमाके के बाद दूसरे कमरे में रह रहे किराएदार गेट की ओर भागे, इसी दौरान कमरे से निकल रहे लौ से वे झुलस गए। धमाके से चूल्हा, बर्तन चिपट गए।
डॉक्टर नहीं पहुंचे इसलिए गए निजी अस्पताल
– घायल इंतकाब ने बताया कि वे सभी अंबेडकर अस्पताल गए थे, लेकिन डॉक्टरों के नहीं पहुंचने पर इलाज शुरू नहीं हो सका। मौके पर मौजूद स्टाफ नर्स से जमकर कहा-सुनी भी हुई। झुलसे लोग दर्द से कराहते रहे लेकिन मरहम-पट्टी तक नहीं की गई। इलाज न होता देख सब निजी अस्पताल में चले गए।