खाने पीने के शौक़ीन हो जाते है इन बीमारियों के शिकार

एर्नोरेक्जिया नर्वोसा: इस समस्या से पीड़ित लोगों को वजन बढ़ने का डर लगा रहता है. वे ज्यादातर खुद को मोटापे का शिकार मानते हैं, तब भी जब उन्हें इस बात का प्रमाण दिया जाए कि उनका वजन सामान्य से कम है और उनमें पोषण की कमी है. इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति दिन में कई बार अपना वजन जांचते हैं और बहुत कम खाते हैं. इसकी वजह से उनमें एनीमिया, भुरभुरे बाल और नाखून, कब्ज, सुस्ती और थकान, नपुंसकता, रक्तचाप में कमी आदि समस्याएं हो सकती हैं.

बुलिमिया नर्वोसा: पीड़ित एक वक्त में बहुत सारा खाना खाते हैं, वह भी अकेले में. इसे बिंज ईटिंग भी कहा जाता है. ऐसे लोगों को लगता है कि उनका खाने पर कोई नियंत्रण नहीं है. इसलिए वे अत्यधिक व्यायाम करने, जबर्दस्ती उल्टी करने और उपवास करने लग जाते हैं.

वे डियूरेटिक्स, लेक्जेटिव्स या एनीमा का इस्तेमाल भी करने लगते हैं. इस वजह से उनमें एसिड रिफ्लक्स डिस्ऑर्डर, गले में लगातार सूजन, पानी की कमी और उल्टी से डीहाईड्रेशन, इलैक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस, गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल गड़बड़ियां आदि हो सकती हैं.

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