खुले में शौच से मुक्त होने वाला इंदौर बना प्रदेश का पहला एवं देश का दूसरा जिला….

इंदौर जिले ने स्वच्छता के क्षेत्र में आज एक नया इतिहास रचा। इंदौर जिला (ग्रामीण) आज पूरी तरह खुले में शौच से मुक्त हो गया। लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन और मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज एक समारोह में सीटी बजाकर इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस सीटी की गूँज प्रदेश के अन्य जिलों को भी खुले में शौच से मुक्त होने की प्रेरणा देगी। इस मौके पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव मौजूद थे।

लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन ने कहा कि खुले में शौच से मुक्त होकर इंदौर जिला प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में आदर्श जिला बन गया है। इस गौरवमयी सफलता से इंदौर की नयी पहचान कायम होगी। उन्होंने कहा कि इंदौर जिले में खुले में शौच से मुक्ति के लिये हुए कार्य से विश्वास एवं संकल्प की जीत हुई है। सबने मिल-जुलकर एकमत होकर इस अभियान में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह इंदौर ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिये गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि इस कार्य में लगे सभी लोगों को सम्मानित किया जायेगा। इसके लिये अलग से एक कार्यक्रम होगा, जिसमें मैं स्वयं आऊंगा। उन्होंने घोषणा की कि इंदौर जिले में अभियान से जुड़ी वानर सेनाओं को दस-दस हजार रुपये, जिले की सभी ग्राम पंचायतों को दो-दो लाख रुपये का पुरस्कार दिया जायेगा। श्री चौहान ने कहा कि इस अभियान में अपना लेपटॉप नहीं लेकर उसके पैसे से शौचालय बनवाने वाले युवा अरूण मकवाना को लेपटॉप दिलवाया जायेगा। महिला जिसने अपने जेवर गिरवी रखकर शौचालय बनवाया है, उसे जेवर दिलवाये जायेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस अभियान में जब तक अपने गाँव के सभी घर में शौचालय नहीं बन जाते तब तक चप्पल नहीं पहनने का संकल्प लेने वाले सरपंच को चप्पल पहनवाई। उन्होंने कहा कि प्रदेश का जो भी जिला इंदौर मॉडल का अनुसरण कर पूरी तरह खुले में शौच से मुक्त होगा उसे भी इसी तरह के पुरस्कार दिये जायेंगे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नामांतरण और बँटवारे के अधिकार ग्राम पंचायतों को दिये जायेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश के अन्य जिलों को भी खुले में शौच से मुक्त करने का अभियान चलाया जायेगा। प्रयास रहेगा कि अगले दो वर्ष के भीतर प्रदेश का हर जिला पूरी तरह खुले में शौच से मुक्त हो जाये। उन्होंने कहा कि अब इंदौर शहर को भी खुले में शौच से पूरी तरह मुक्त करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिये भी पुरजोर प्रयास किये जा रहे हैं। सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। नर्मदा को क्षिप्रा से जोड़ने के बाद अब नर्मदा-गंभीर लिंक परियोजना का कार्य भी हाथ में लिया गया है। इससे इंदौर जिले के देपालपुर क्षेत्र के 53 एवं साँवेर के 28 गाँव में सिंचाई की सुविधा मिलेगी।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने वानर सेना बच्चों से मुलाकात की और उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रारंभ में प्रदर्शनी का अवलोकन किया। समारोह में अभियान से जुड़े लोगों ने अपने-अपने अनुभव भी सुनाये। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव ने भी सम्बोधित किया।

खुले में शौच से मुक्त होने वाला पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के बाद इंदौर देश का दूसरा तथा प्रदेश का पहला जिला बन गया है। इंदौर में आम लोगों ने आगे आकर इस काम में भागीदारी की और स्वयं इसकी माँग की।

जिले की सभी 312 ग्राम पंचायत के 610 गाँव में शौचालय बन गये हैं। सभी लोग इन शौचालयों का उपयोग कर रहे हैं। कलेक्टर द्वारा गठित दलों ने इसका प्रमाणीकरण भी किया है। इस कार्य में गाँव के बच्चों ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन बच्चों की वानर सेना ने अपने माता-पिता से जिद कर घरों में शौचालय बनवाये और लोगों को खुले में शौच करने से रोका। गांवों की महिलाएँ भी इस काम में पीछे नहीं रही। उन्होंने घर-घर जाकर इसकी अलख जगाई। वानर सेना और महिलाओं ने प्रतिदिन सुबह 4 बजे से लगातार इस बात की निगरानी की कि कोई भी खुले में शौच तो नहीं जा रहा।

अभियान में वानर सेना में जिले के 10 हजार से अधिक बच्चों ने भाग लिया है और यह लगातार सक्रिय हैं। महिलाओं ने लोकगीत बनाकर खुले में शौच के विरूद्ध वातावरण बनाया। जन- प्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने ढंग से लोगों को इस बात के लिये प्रेरित किया। कई जगह उन्होंने आर्थिक सहयोग कर भी लोगों के घर में शौचालय बनवाये। इंदौर जिले में संचालित स्वच्छता संग्राम अभियान में महिलाओं और बच्चों ने पुरूषों से घर पर शौचालय की माँग की। प्रशासन के सहयोग से अथवा खुद के सामर्थ्य से घरों में शौचालय बनाये और पड़ोसियों को भी प्रेरित किया। शौचालय का उपयोग न करने वालों को शौचालय का उपयोग करने के लिये मनाया। गाँव में शर्म यात्राएँ निकाली गई। शौच के लिए उपयोग होने वाले लोटा, बॉटल को सबके सामने जलाया गया। खुले में शौच से मुक्त होने के बाद गाँवों में गर्व यात्राएँ निकाली गयीं।

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