गंगोत्री से केदारनाथ तक की यात्रा 150 किलोमीटर तक कम हो सकती है

गंगोत्री से केदारनाथ तक की यात्रा 150 किलोमीटर तक कम हो सकती है। दोनों धामों को जोड़ते पैदल ट्रैक को चौपहिया वाहनों लायक बनाने की कोशिश में सरकार जुट गई है। इसके लिए उत्तराखंड सरकार जल्द ही केंद्र को प्रस्ताव भेजेगी।पूरी कवायद पर्यटन विभाग के स्तर पर की जा रही है। अभी तक की स्थिति में गंगोत्री से केदारनाथ तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग से करीब साढे़ तीन सौ किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है।घुत्तु-पंवालीकांठा होते हुए सोनप्रयाग-केदारनाथ पहुंचने वाले पैदल ट्रैक के सड़क मार्ग में तब्दील हो जाने के बाद यह दूरी सिर्फ 200 किलोमीटर की रह जाएगी। इस प्रस्ताव पर सरकार इसलिए भी आगे बढ़ रही है कि इस पैदल ट्रैक के बीच में मल्ला से सौंरासारी और कुछ एक जगह पर या तो पक्की सड़क बनी है या फिर प्रस्तावित है।पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के अनुसार, पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए इस पैदल रूट का सड़क मार्ग में परिवर्तित होना जरूरी है। इसलिए प्रस्ताव तैयार कराकर जल्द ही केंद्र को भेजा जाएगा।गंगोत्री से उत्तरकाशी, लंबगांव, घनसाली, चमियाला, तिलवाड़ा, सोनप्रयाग होते हुए केदारनाथ।यह पैदल रूट होगा अब परिवर्तित गंगोत्री, मल्ला, सौंरासारी, बेलख, बूढ़ाकेदार, घुत्तु, पंवालीकांठा, सोनप्रयाग होते हुए केदारनाथ।यहां छोटा रास्ता है, पर कम इस्तेमाल
केदारनाथ और बद्रीनाथ यात्रा के लिए ज्यादातर पर्यटक और यात्री जो सड़क इस्तेमाल करते हैं, उसके अनुसार दोनों धामों की सड़क दूरी करीब ढाई सौ किलोमीटर है। यह सड़क केदारनाथ से अगस्तयमुनि, रुदप्रयाग, कर्णप्रयाग, जोशीमठ होते हुए बद्रीनाथ पहुंचता है।इसके विपरीत, एक दूसरा रास्ता है, जो कि केदारनाथ से चोपता, मंडल, गोपेश्वर, जोशीमठ होते हुए बद्रीनाथ पहुंचता है। इसकी दूरी करीब दो सौ किलोमीटर है। करीब 50 किलोमीटर सड़क दूरी कम होने के बावजूद अपेक्षाकृत कम यात्री इसका इस्तेमाल करते हैं। इसके पीछे वजह, इस मार्ग की बेहतर हालत न होना है। सरकार ध्यान दे, तो यह मार्ग यात्रियों के लिए ज्यादा सुगम साबित हो सकता है।