गांधी स्टोरी

गांधी जी ने मुझसे पुछा कि बेटा क्या करते हो? मैंने कहा कि पढ़ाई करता हूं। तो उनका कहना था कि पढ़ना अच्छी बात है, लेकिन सूत कातते हो या नहीं? मेरे न कहने पर उन्होंने कहा कि सूत काता करो और उससे बने कपड़े ही पहना करो। मुझे यकीं है कि तुम्हारे पिताजी भी सूत कातते होंगे। उन्होंने मुझे सूत कातने के लिए एक कतली भी दी थी। तब से लेकर आज तक मैं सूत भी कातता हूं और हमेशा खादी से बने वस्त्र ही पहनता हूं।’ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से 9 साल की उम्र में मुलाकात का यह किस्सा अब 86 वर्ष के बुजुर्ग शख्स प्रेम नारायण मालवीय ने बयां किया। उन्होंने गांधी जी तब की थी, जब वर्धा से ट्रेन से भोपाल होते हुए दिल्ली जा रहे थे और मैं व पिताजी अपॉइंटमेंट लेकर उनसे स्टेशन पर मिले थे।

-गांधी जी की सीख को जीवनभर अपनाया

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का पूरा जीवन ही लोगों के लिए एक सीख रहा है। उन्हीं में से एक है वयोवृद्घ प्रेमनारायण मालवीय। जिन्होंने गांधी की एक छोटी सी सीख को जीवनभर के लिए अपना लिया। दरअसल, कभी राजनीति में सक्रिय रहे और वर्तमान में महात्मा गांधी मेमोरियल आश्रम के अध्यक्ष प्रेमनारायण मालवीय की पहली मुलाकात महात्मा गांधी से उम्र के उस पड़ाव पर हुई थी, जब अल्हड़पन और चंचलता अपने चरम पर होती है। किसी की बातें मन पर गहरा प्रभाव नहीं डालती, लेकिन महात्मा गांधी के आभामंडल ने 9 साल के प्रेमनारायण पर ऐसा असर डाला कि उस दिन से लेकर आज तक वे गांधी की बात का अनुसरण कर उन्हीं की राह पर चल रहे हैं।

-गांधीजी व पिताजी का जन्मदिवस भी एक ही दिन

प्रेम नारायण मालवीय के पिताजी पंडित चतुर नारायण मालवीय स्वतंत्रता सेनानी थे। प्रेम नारायण बताते हैं कि फ्रीडम फाइटर होने के कारण पिताजी का जेल आना-जाना लगा ही रहता था। वे कई बार गांधी जी से मिले थे। वर्धा और साबरमती आश्रम में भी लंबे समय तक गांधीजी के साथ रहे। पिताजी आजादी के बाद 1948 में 9 महीनों के लिए नवाबों के यहां प्राइम मिनिस्टर भी नियुक्त किए गए थे। ये इत्तेफाक की बात है कि स्वतंत्रता सेनानी, गांधीवादी और महात्मा गांधी मेमोरियल आश्रम की स्थापना करने वाले मेरे पिताजी का जन्मदिवस भी 2 अक्टूबर को ही होता है।