गांवों में लगे हरे पत्थरों पर दर्ज कई पंक्तियों में काननू की गलत व्याख्या, यह देशद्रोह जैसा

रायपुर. जशपुर और आसपास लगातार गहरा रहा पत्थलगड़ी मामला कानूनी तौर पर कितना सही है और कितना गलत, इसका भास्कर ने कानूनविदों से विश्लेषण करवाया है। कानूनविदों की राय है कि गांवों में रखे गए हरे पत्थरों में दर्ज कई पंक्तियों में कानून की जो व्याख्या की गई है, वह सही नहीं है। यही नहीं, ग्रामसभा को असीमित अधिकार तो हैं, लेकिन वह गांव में किसी का प्रवेश रोक नहीं सकती है। कौशल स्वर्णबेर की रिपोर्ट:

 

पत्थलगड़ी आंदोलन के तहत तीन गांवों में जो पत्थर रखे गए हैं, उनमें कानन के अलग- अलग अनुच्छेद का हवाला दतेे हुए इसे सही करार देने की कोशिश की गई है, लेकिन अब इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं। काननूविदों के मुताबिक इन शिलालेख में जितने भी अनुच्छेदलिखे गए हैं उसमें उसकी पहली लाइन को लिखकर ही माइंड गेम खेला गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक पत्थरों पर लिखी कुछ पंक्तियां तो सही हैं, लेकिन कुछ पंक्तियों के जरिये लोगों को भड़काने की कोशिश को राजद्रोह की संज्ञा भी दी जा सकती है।

किस अनुच्छेद के क्या मायने

1. पत्थर पर पहली लाइन में अनुच्छेद 13(3)क का जिक्र किया गया है जिसमें जनजातियों के रुढ़ी व प्रथा को विधि का बल प्राप्त है। इसे ऐसा बताया जा रहा है जैसे कि जनजाती समुदाय अपने मुताबिक काननू बना सकती है जबकि इसका मूलरुप है कि जो भी जनजातियों में रुढ़ि व प्रथा चली आ रही है जिसे काननू में मान्यताप्राप्त है वह लागू रहेगी।

2. दूसरी पंक्ति में अुच्छेद 244(1)(2) का जिक्र किया गया है। जिसमें पूर्व स्वशासन व नियंत्रण की शक्ति है लिखा गया है। यह अनुच्छेद असम राज्य के जनजाति क्षेत्रों के लिए बनाई गई है। जिसमें लिखा गया है कि संसद विधि द्वारा असम राज्य के भीतर एक स्वशासी राज्य बना सकेगी साथ ही इसके संचालन के लिए वह विधान मंडल या मंत्रिमंडल भी बना सकेगी।

3. तीसरी पंक्ति में अनुच्छेद 19(5)(6) का उल्लेख करते हुए लिखा गया है कि जनजातियों के स्वशासन व नियंत्रण क्षेत्र में गैर लोगों के मौलिक अधिकार लागू नहीं हैं। जिसे कानूनविदों ने सही करार दिया है।

4. चौथी पंक्ति में अनुच्छेद 244(1) कंडिका (5) क के हवाले से लिखा है कि कोई भी सामान्य कानून जैसे आईपीसी, आरपीसी और भूमि अधिग्रहण कानून पांचवीं अनुसूची वाले इलाकों में लागू नहीं है। कानूनविदों के अनुसार यह गलत व्याख्या है।

5. नीचे की पंक्तियों ने जिन फैसलों के आधार पर जो तथ्य लिखे गए हैं, वह सीधे वैसा नहीं है। फैसला साक्ष्य आैर परिस्थितियों के अनुसार हुए हैं। इन्हें कानून बताकर लोगों को बरगलाने का काम किया जा रहा है।

इसलिए राजद्रोह : संविधान के मुताबिक जो काेई बोले गए या लिखे गए शब्दों या संकेतों द्वारा दृश्यरूपण द्वारा अन्यथा विधि द्वारा स्थापित सरकार के प्रति घृणा या अवमानना पैदा करेगा, या पैदा करने का प्रयत्न करेगा, ऐसे कृत्यों को राजद्रोह की श्रेणी में रखा गया है।

ग्रामसभा के अधिकार भी दायरे में, यह स्वायत्त संस्था नहीं ह

– पत्थलगड़ी में दूसरा महत्वपूर्ण मसला ग्रामसभा के अधिकारों से जुड़ा हुआ है। गांवों में लगाए गए हर पत्थर का सबसे पहला वाक्य यही है कि सबसे ऊंची ग्रामसभा है। गांव से सबं ंं धित सभी मामले उसी के अधीन है। लेकिन काननूविदों का कहना है कि ग्रामसभा को सारे अधिकार एक दायरे में ही दिए गए हैं तथा इन अधिकारों के आधार पर वह खदु को स्वायत्त संस्था नहीं घोषित कर सकती। विशेषज्ञों के मुताबिक जल, जंगल और जमीन पर ग्रामसभा का हक है, लेकिन वह गांव में किसी को घुसने से नहीं रोक सकती। ग्रामसभा के अधिकारों को ऐसे समझ सकते हैं।

ग्रामसभा कानून से ऊंची नहीं

– अनुसूचित क्षेत्र में सभा को यह अधिकार है कि वह अपने यहाँ के जनजातीय समुदाय तथा व्यक्तियों की परंपरा, संस्कृतिक पहचान तथा समुदायिक साधनों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए।

– ग्राम सभा (अनुसूचित जनजाति समुदाय) में आपसी झगड़ों तथा विवाद निपटाने के लिए अनुसूचित जनजाति में जो पुराने रिवाज चले आ रहे हैं, उन्हें भी बचाएगी। अर्थात ग्रामसभा इन विषयों पर फैसला ले सकती है, जिसे संबंधित पक्षों को मानना होगा।

– ग्रामसभा अपनी सीमा के भीतर आने वाले जल, जंगल तथा जमीन की प्रचलित नियम के अनुसार देखभाल करेगी। इनसे जुड़े किसी भी विवाद का निपटारा करते समय ग्रामसभा यह ध्यान रखेगी कि फैसला संविधान की मूल भावना के खिलाफ न हो।

– ग्राम सभा अपनी सीमा के भीतर आने वाले सभी बाजारों और सभी प्रकार के पशुमेलों का प्रबंधन करेगी इसका मतलब यह हुआ कि ग्राम सभा यह तय कर सकेगी कि मेला कब, कहाँ और कैसे लगेगा वगैरह।

– ग्राम में लागू की जाने वाली सभी प्रकार की योजनाओं (जनजातीय-उपयोजना सहित) पर ग्राम सभा का नियंत्रण रहेगा। यानी ग्राम सभा ही यह तय करेगी कि कौन सी योजना ग्राम सभा लागू होंगे।

– ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे कृत्यों, जिसे राज्य सरकार तत्समय प्रवृत किसी विधि के अधीन उसे प्रदत्त करे या न्यस्त करे का पालन करेगी।

– धारा 10 (1) (क) में विनिर्दिष्ट कृत्य तथा धारा 10 (5) में वर्णित अनुसूचित क्षेत्र में ग्राम सभा के अतिरिक्त शक्तियों एवं कृत्यों के अलावा राज्य सरकार समय – समय अनुसूचित क्षेत्र में ग्राम सभा को अन्य अतिरिक्त शक्तियाँ तथा कृत्य निर्धारित कर सकेगी।

– ग्राम सभा, ग्राम पंचायत के कृत्यों से संबंधित किसी विषय पर विचार करने के लिए स्वतंत्र होगी तथा ग्राम पंचायत इनकी सिफारिशें को तत्समय प्रवृत नियमों के आलोक में कार्यान्वित करेगी।

– धारा 10 (1) तथा धारा 10 (5) में ग्राम सभा के वर्णित कृत्य तत्समय प्रवृत सरकार / के अधिनियमों/नियमों एवं उनके क्षेत्राधिकार को प्रभावित नहीं करेगा।

शुरू से अब तक

– उल्लेखनीय है कि जशपुर जिले के तीन गांव बच्छरांव, बुटंगा आैर सिहारडांड के लोगों ने गांव में पत्थर गाड़कर ग्राम सभा को सबसे ऊंचा बताया है। साथ ही पांचवी अनुसूची के नियमों को लिखकर पूरे इलाके में अपना अधिकार जताना शुरु कर दिया है। इसके बारे में पड़ताल करने गई पुलिस आैर प्रशासन की टीम को ग्रामीणों ने बंधक भी बना लिया था। जिसके बाद से मामला उग्र हो गया है। इस मामले में आधा दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कुछ पर देशद्रोह जैसी धाराएं भी लगाई गई हैं।

पत्थलगड़ी में कई बातें सही लेकिन प्रशासन से बर्ताव गलत

– रिजवी वरिष्ठ क्रिमिनल लाॅयर फैसल रिजवी के मुताबिक पत्थरगड़ी में लिखी गई बातें सही हैं, लेकिन गांवों में इस आधार पर पुलिस-प्रशासन से किया गया बर्ताव पूरी तरह गलत है। शासन को आदिवासियों को समझाना चाहिए कि आपकी मर्जी के बगैर आपके जमीन आैर जंगल पर दूसरा कोई नहीं घुस सकता। लिखी गई बातों को गलत तरीके से समझाया जा रहा है। क्योंकि कई लोग संविधान में लिखी गई बातों को ठीक से समझ नहीं सकते। पत्थर में अनुसूचित क्षेत्र को संविधान में प्राप्त अधिकार का जिक्र किया गया है। इसे तोड़ना संविधान का अपमान है।