गीता में लिखी इन 3 बातों को खुद पर करें लागू, हमेशा खुश रहेंगे आप

ऋषि-मुनियों ने गीता का महत्व गंगा से भी अधिक माना है। गंगा तो भगवान के श्रीचरणों से निकली और गीता भगवान के हृदय क्षेत्र से। गीता के अठहत्तर भाषाओं में 250 से ज्यादा अनुवाद, दर्जनों टीकाएं एवं भाष्य हो चुके हैं।गीता साधारण कर्म को योग में बदलने के लिए तीन साधनों पर बल देती है, एक- फल की आकांक्षा का त्याग। दूसरे, कर्त्ता के अहंकार से मुक्ति और तीसरे, किए गए कर्मों को परमात्मा के प्रति समर्पित करना। इन सूत्रों में वेदों एवं  उपनिषदों का सार भी झलकता है। ज्ञान, भक्ति एवं कर्म की इस अनूठी त्रिवेणी को जितनी बार पढ़ते जाता है, उसके आगे ज्ञान के नित नए रहस्य खुलते जाते हैं। ऋषि-मुनियों ने गीता का महत्व गंगा से भी अधिक माना है। गंगा तो भगवान के श्रीचरणों से निकली और गीता भगवान के हृदय क्षेत्र से। गीता के अठहत्तर भाषाओं में 250 से ज्यादा अनुवाद, दर्जनों टीकाएं एवं भाष्य हो चुके हैं।गीता साधारण कर्म को योग में बदलने के लिए तीन साधनों पर बल देती है, एक- फल की आकांक्षा का त्याग। दूसरे, कर्त्ता के अहंकार से मुक्ति और तीसरे, किए गए कर्मों को परमात्मा के प्रति समर्पित करना। इन सूत्रों में वेदों एवं  उपनिषदों का सार भी झलकता है। ज्ञान, भक्ति एवं कर्म की इस अनूठी त्रिवेणी को जितनी बार पढ़ते जाता है, उसके आगे ज्ञान के नित नए रहस्य खुलते जाते हैं। अठारह अध्यायों के सात सौ श्लोकों में समाई इस अद्भुत ज्ञान गंगा का कोई सानी नहीं है।  मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में कृष्ण ने अर्जुन को इस ज्ञान का संप्रेषण किया, इसलिए इस दिन को मोक्षदा एकादशी तथा गीता जयंती के रूप में भी जाना जाता है।….