गुजरात के आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है

गुजरात के आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है। पिछले 15 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब गुजरात के विधानसभा चुनाव में पार्टी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अलावा अन्य चेहरों का भी सहारा लेना पड़ेगा। पार्टी पूरी तरह से आक्रामक चुनाव प्रचार के मूड में है और समझा जा रहा है कि जल्द स्टार प्रचारक राज्य का दौरा तेज करे देंगे। पिछले विधानसभा (2012) और 2014 में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव तक तत्कालीन मुख्यमंत्री और देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही पर्याप्त थे। पार्टी उनके चेहरे पर विरोधियों को चित कर देती थी। लेकिन अब राज्य की परिस्थितियां कुछ बदली सी हैं। एक तरफ जहां कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के कार्यक्रम में भीड़ बढ़ रही है, वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सभा से लोगों का आकर्षण कम होने की सूचना आ रही है।भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को भी विपरीत स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि भाजपा मुख्यालय के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि इस तरह की कोई स्थिति नहीं है। भाजपा गुजरात विधानसभा चुनाव भारी अंतर से जीतेगी।  विधानसभा में चुनाव जीत और राज्य में पार्टी की सरकार बनने को लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी पूरी तरह से आश्वस्त हैं। इस तरह के सवाल की प्रतिक्रिया में शाह साफ कहते हैं कि सवाल (भाजपा के हारने) ही नहीं है। शाह कांग्रेस की जाति के आधार पर अपने नेताओं की जिम्मेदारी तय करने पर भी कटाक्ष करते हैं। उनका कहना है कि गुजरात में भाजपा जाति पर आधारित राजनीति नहीं करती।वहीं पार्टी के एक अन्य नेता का कहना है कि राज्य में भाजपा की 22 साल से अधिक समय तक सरकार रही है। वहां से प्रधानमंत्री के केन्द्र में आने के बाद आनंदी बेन पटेल मुख्यमंत्री रही और फिर विजय रुपानी मुख्यमंत्री बने। इसका कुछ तो असर रहेगा ही, लेकिन फिर भी भाजपा ही राज्य की जनता की पहली पसंद है। सूत्र का कहना है कि पाटीदार समाज का एक बड़ा तबका भी भाजपा के साथ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के अलावा कपड़ा और सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी, भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, रेल और कोयला मंत्री पीयूष गोयल, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि उ.प्र. विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण की तरह प्रधानमंत्री राज्य में भरपूर प्रचार अभियान चला सकते हैं। वैसे भी वह एक महीने में तीन से ज्यादा बार गुजरात का दौरा कर चुके हैं।
वित्तमंत्री अरुण जेटली भी गुजरात का दौरा कर सकते हैं। हालांकि पार्टी के अंदरखाने के सूत्र बताते हैं कि नोटबंदी, जीएसटी समेत कुछ अन्य निर्णयों के कारण वित्त मंत्री का ग्राफ थोड़ा गिरा है। वैसे भी वह स्टार प्रचारक की भूमिका में कम ही रहते हैं।
योगी करेंगे दौरा उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुजरात जाएंगे। वह वहां पार्टी के पक्ष में चुनाव प्रचार करेंगे। सूत्र बताते हैं कि अगले महीने में योगी कम से कम दो बार गुजरात विधान सभा चुनाव प्रचार में राज्य का दौरा कर सकते हैं।  इस दौरान उनकी तीन-तीन जनसभाएं हो सकती हैं। इसी तरह से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और म.प्र. के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पार्टी के प्रचार के लिए राज्य का दौरा कर सकते हैं।
कुछ तो दिखा रहे हैं चेहरा केन्द्र सरकार के कुछ मंत्री ऐसे भी है जिन्होंने पिछले कुछ समय लगातार गुजरात विधानसभा चुनाव के बाबत प्रचार के लिए पार्टी को समय देना शुरू कर दिया है। वह अपना कार्यक्रम लगवाने के लिए निजी स्तर पर प्रयासरत हैं। एक मंत्री के बारे में आम है कि वह चार दिन दिल्ली में तो दो दिन गुजरात में रह रहे हैं। बताते हैं प्रस्तावित गुजरात विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए नाक का सवाल बन गया है।फिलहाल राहत की बात यह है कि संघ पूरी तरह से भाजपा के साथ है। आरएसएस ने अपने अनुशांगिक संगठनों तथा अन्य राज्य के प्रचारकों से भी गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा का साथ देने की हिदायत दी है। यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय विश्व परिषद के अध्यक्ष प्रवीण भाई तोगडिया तक को इसे लेकर आरएसएस ने आगाह किया है।