गुजरात के शहरी मतदाता अब भी भाजपा के साथ, ग्रामीण क्षेत्र में कांग्रेस की पकड़ मजबूत ….

गुजरात  के शहरों में पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की रैलियों में हिस्सा लेने के लिये बड़ी संख्या में लोग उमड़े लेकिन जब मतदान करने की बारी आई तो उन्होंने भाजपा को चुना। भाजपा की कुल 99 सीटों में से तकरीबन एक तिहाई सीटें राज्य के आठ बड़े शहरों से आईं। हार्दिक ने चुनाव में कांग्रेस का समर्थन किया था। यद्यपि शहरी सीटों की संख्या में 2012 के चुनाव के मुकाबले भाजपा को दो सीटों का नुकसान हुआ है लेकिन वह ज्यादातर शहरी मतदाताओं के समर्थन को हासिल करने में कामयाब रही।

वही पर कांग्रेस की बात करे तो कांग्रेस की पकड़ ग्रामीण क्षेत्रो में आज भी पुरानी तरह मजबूत हे |गांधीनगर शहर में दोनों पार्टियों ने एक-एक सीट अपनी झोली में डाली जबकि जूनागढ़ शहर की एक सीट कांग्रेस के खाते में इसबार गई। पहले यह सीट भाजपा की झोली में थी। इन शहरों को छोड़कर भाजपा ने अन्य सभी बड़े शहरी क्षेत्रों में क्लीन स्वीप किया। उसने राजकोट की सभी तीन सीटें, जामनगर की दो सीटों, भावनगर की दो शहरी सीटों, वड़ोदरा शहर की सभी पांच सीटों और सूरत शहर की सभी 11 सीटों पर जीत हासिल की।

साथ ही इस बार भी पटेल और पाटीदार समाज का एक एक बहुत बड़ा  तबका  का भाजपा के साथ खड़ा रहा | ग्रामीण क्षेत्रों पर भाजपा की पकड़ ढीली पड़ी। वहां मतदाताओं ने कांग्रेस को ज्यादा तरजीह दी। चुनाव के नतीजे दर्शाते हैं कि भाजपा को 14 ग्रामीण सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। उसने उतनी ही सीटें अपनी झोली में डालीं। साल 2012 में कांग्रेस ने ग्रामीण क्षेत्र की 57 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि भाजपा ने 77 सीटों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस की ग्रामीण क्षेत्र की सीटों की संख्या इसबार 57 से बढ़कर 71 हो गई।