गुजरात में हार, लेकिन सीट बढ़ने से बढ़ा प्रदेश कांग्रेस का उत्साह…

रायपुर : भले ही कांग्रेस गुजरात का चुनाव हार गयी हो रायपुर। , लेकिन इस बार सीट बढ़ने को लेकर पार्टी के नेता उत्साहित हैं। छत्तीसगढ़ के कांग्रेस नेताओं का दावा है, गुजरात चुनाव में एड़ी-चोटी का जोर लगाने के बाद भी भाजपा का पसीना छूट गया इससे पार्टी नेताओ में खासा उत्साह बना हुआ है और कार्यकर्ता भी अपने स्तर पर उत्साहित है | आप की जानकारी के लिए बता दे की अगले वर्ष प्रदेश में भी चुनाव है | जिसमे कांग्रेस का उत्साह और ऊपर जा सकता है |यह बात स्पष्ट है जिन राज्यों में लंबे समय से भाजपा की सरकार है, वहां खतरे की घंटी बजने लगी है।

गुजरात में जिस तरह से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भाजपा के खिलाफ आक्रामकता दिखाई, उसी तरह का आक्रामक तेवर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस, भाजपा सरकार के खिलाफ बनाए रखेगी। कांग्रेस की दो कोशिश रहेगी, पुरानी सीटों को बचाने और भाजपा, बसपा व निर्दलीय विधायक के कब्जे वाली लगभग डेढ़ दर्जन सीटों में सें लगाने की।गुजरात में भाजपा ने 30 केंद्रीय व केंद्रीय राज्य मंत्रियों और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों को प्रचार में लगाया। इसके बाद भी पिछले चुनाव की तुलना में भाजपा को 16 सीटों का नुकसान हुआ, वहीं कांग्रेस को 16 सीटों का फायदा। 2014 के विानसभा चुनाव में भाजपा को 115 और कांग्रेस को 61 सीट मिली थी। 2017 के चुनाव में भाजपा 99 सीटों में सिमटकर रह गई, वहां कांग्रेस को 77 सीटों पर जीत मिली। जीत का अंतर कम हुआ है।
आदिवासी सीटों को नहीं छोड़ेगी पार्टी:

गुजरात में पाटीदार आरक्षण को समर्थन देकर कांग्रेस ने जिस तरह से फायदा उठाया, उसी तरह की कवायद छत्तीसगढ़ में जारी है। बस्तर की 12 सीट के अलावा सरगुजा और दुर्ग संभाग की आदिवासी सीटों को कांग्रेस पकड़कर रखेगी। बस्तर और उसके बाद दुर्ग संभाग के गांवों में पदयात्रा कर कांग्रेस ने यह साफ भी कर दिया है। बस्तर की आदिवासी सीटों में से आठ में कांग्रेस और चार में भाजपा के विधायक हैं। सरगुजा की 14 सीटों में भाजपा और कांग्रेस का सात-सात सीटों पर कब्जा है। बस्तर और सरगुजा में भाजपा सीट बढ़ाने की पूरी कोशिश कर रही है। इस कारण पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रमलाल कौशिक भी बस्तर का दौरा कर चुके हैं।