गुलामी वाले श्रम कानूनों के लिए बदनाम है कतर, दुनियाभर के आतंकी समूहों को पनाह देने का आरोप

अरब देशों के गठबंधन में उस समय एक बड़ा बदलाव देखने को मिला जब सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मिश्र ने पडोसी मुल्क कतर से तमाम संबंध तोड़ने का ऐलान कर दिया। चारों देशों ने कतर पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालने का आरोप लगाते हुए अपने अपने राजनयिकों को भी वापस बुलाने का फरमान जारी कर दिया है।
इसके अलावा चारों देशों में रह रहे कतर के नागरिकों से वापस अपने देश लौटने और कतर में रह रहे अपने नागरिकों को 15 दिन में वापिस आने का आदेश जारी कर दिया गया है। अरब गठबंधन के चार महत्वपूर्ण देशों द्वारा आनन फानन में की गई इस कार्रवाई के बाद सवाल खड़ा हो गया है आखिर क्या कतर के हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि क्षेत्रीय देशों को उसके ‌खिलाफ इतनी कड़ी कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा?
ऐसे में सवाल ये भी खड़ा हो गया है कि अरब देशों के बाद क्या बाकी दुनिया के देश भी कतर के खिलाफ ऐसे कदम उठा सकते हैं, क्योंकि पिछले कुछ समय से अमेरिका लगातार कतर पर सवाल खड़े करता रहा है और उसके खिलाफ प्रतिबंध की चेतावनी तक दे चुका है। जानकारों की मानें तो पिछले कुछ सालों में कतर के हालात लगातार बिगड़े हैं जिसका असर उसकी छवि पर भी पड़ा है। मौजूदा प्रतिबंधों का असर कतर में 2022 में होने वाले फुटबाल विश्व कप पर भी पड़ सकता है, जिसको लेकर कतर काफी उत्साहित है।
गुलामी वाले श्रम कानूनों के लिए बदनाम है कतर

लगभग 26 लाख की आबादी वाला कतर अपने श्रम कानून कफाला को लेकर काफी बदनाम रहा है। जिसे गुलामी का कानून भी कहा जाता है। कफाला कानून के तहत नौकरी देने वाले नियोक्ता को उक्त श्रमिक के जीवन को नियंत्रित करने के अधिकारी भी मिल जाते हैं।

कतर की लगभग 70 फीसदी आबादी प्रवासियों की है जो बेहतर रोजगार की तलाश में तेल समृद्ध देश में खिंचे चले आते हैं। उनमें भी सबसे ज्यादा संख्या भारतीय कामगारों की हैं। हालांकि कहा जाता है कि ये सब यहां गुलामों जैसा जीवन व्यतीत कर रहे हैं। काफला कानून के तहत बिना अपने नियोक्ता की मंजूरी के कोई भी श्रमिक नौकरी नहीं बदल सकता, ऐसा करने पर उसे जेल भेज दिया जाता है या बड़ा जुर्माना भरना पड़ता है।

कतर में विदेशी श्रमिकों के लिए ज्यादातर ठेकेदारी प्रथा ही है, बाहर से आने वाले लोग इन ठेकेदारों के जरिए ही कतर की कंपनियों या संस्‍थाओं में काम पाते हैं। सबसे बड़ी विडंबना ये है ‌कि कोई श्रमिक अगर काम छोड़कर वापस अपने मुल्क जाना चाहे तो उसे बिना कंपनी की अनुमति के देश छोड़ने की अनुमति नहीं मिलती। बल्कि ऐसा करने वालों को उल्टे सीधे आरोप लगाकर आपराधिक मामलों में जेल भेज दिया जाता है।

श्रम कानूनों का ऐसा खुला उल्लंघन कतर सरकार की निगाहों के सामने होता था और सरकार मौन साधे रहती थी। हालांकि दुनियाभर में आलोचनाओं और दबाव के बाद कतर ने कफाला सिस्टम को खत्म कर दिया है। उसकी एक बड़ी वजह ये भी है कि कतर में साल 2022 में फुटबाल वर्ल्ड कप का आयोजन होना है और उसके लिए होने वाले स्टेडियमों के निर्माण में श्रमिकों के मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं।

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