गेहूं-दालों में जिंक-सल्फर घटने से कम लंबाई के बच्चे ले रहे जन्म

खेती के आधुनिकीकरण व एक साल में कई फसलें लेने के कारण मिट्टी में लगातार जिंक, सल्फर, बोरोन जैसे पोषक तत्वों की कमी होती जा रही है। इसका असर मनुष्य के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। नवजातों में खून की कमी, बच्चों की घट रही औसतन लंबाई, सुस्ती व याददाश्त में कमी का कारण भी पोषक तत्व विहीन मिट्टी में उगने वाली फसलें हैं।

महिलाओं को खाने में सही पोषण नहीं मिलने के कारण बच्चे कुपोषित पैदा होते हैं। यह बात सूक्ष्म एवं गौण पोषक तत्व अखिल भारतीय सम्मिक परियोजना, भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान भोपाल (आईआईएसएस) के पीसी माइक्रोन्यूट्रीयंट डॉक्टर पीसी शुक्ला ने अपनी तीन साल की रिसर्च में साबित की है।

संस्थान मिट्टी में हो रहे पोषक तत्वों की कमी पर सालों से सर्वे करता रहा है, लेकिन पहली बार प्रदेशभर के 51 जिलों का सर्वे किया गया। चार साल में हुए सर्वे में बताया गया कि जो पोषक तत्व फसलों के लिए आवश्यक हैं, वही मनुष्य के लिए भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। यह सिद्ध भी हो चुका है कि जमीन की गुणवत्ता में कमी का असर फसलों और फिर मनुष्यों में भी देखने को मिल रहा है। यह बदलाव कई सालों में हुआ है, जिसके परिणाम ीरे-ीरे सामने आ रहे हैं।

प्रदेशभर में मिट्टी में इन तत्वों की इतनी कमी

सल्फर – 58 प्रतिशत

जिंक – 55 प्रतिशत

आयरन – 7.50 प्रतिशत

बोरान – 7.00 प्रतिशत

मैगनीज – 3.50 प्रतिशत

कॉपर – 1.00 प्रतिशत

इंदौर में सल्फर की कमी

कृषि महाविद्यालय के डीन व वैज्ञानिक डॉ. अशोक कृष्णा ने बताया रिपोर्ट में हुए खुलासे में इंदौर व आसपास के क्षेत्रों में सबसे अकि 60 फीसदी सल्फर की कमी पाई है, जिसमें देपालपुर, इंदौर और महू शामिल हैं। वहीं 12 फीसदी जिंक की और 32 फीसदी अन्य तत्वों की अप्रत्यक्ष (जो पौों में दिखता है लेकिन मिट्टी की जांच में नहीं मिलता) कमी पाई गई है।

तत्वों की कमी से होने वाले रोग

सल्फर – मुंहासे, अर्थराइटिस, नाखून और बाल झड़ना या विकृत होना, शरीर में ऐंठन, डायरिया, मेमोरी लॉस (याददाश्त में कमी), गैस्ट्रिक समस्या, जख्म भरने में देरी होना, मोटापा, हृदय संबंी बीमारी व अल्जाइमा।

जिंक – बच्चे की औसत लंबाई में कमी या शरीर का विकास रुकना, रोग प्रतिरोक क्षमता घटना, डायरिया व प्रीमोनिया।

बोरोन – ऑस्टियोपोरोसिस, हड्डी में कमजोरी, अर्थराइटिस, बुढ़ापे में हड्डी का कमजोर होना।

फसल के साथ मनुष्य के लिए भी जरूरी

फसल को जरूरी तत्व नहीं मिलते हैं तो इसका असर खाने पर पड़ेगा। इससे मानव स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, जो एक लंबी प्रक्रिया है – डॉ. एके शुक्ला, पीसी माइक्रोन्यूट्रीयंट, भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान

महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जिंक व सल्फर

जिंक व सल्फर जैसे तत्व बच्चों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पर फसलों में जो कमी आ रही है, उसका असर बच्चों के विकास पर पड़ना लाजमी है – डॉ. हेमंत जैन, अीक्षक, चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय