गोदाम-भवन के किराए से बंट रहा था वेतन, किराया घटा तो हुई वेतन की कमी

गोदाम-भवन किराए पर देकर पैसे कमाने वाले तिलहन संघ की आय में लगातार कमी हो रही है। हालात यह है कि बीते दो साल में जो आय एक करोड़ से ज्यादा थी, वह अब सिमटकर 27 लाख रुपए पर आ गई है। इसका सीधा तिलहन संघ के कर्मचारियों पर पड़ रहा है। अब उन्हें आने वाले दिनों वेतन देने का संकट संघ के सामने पैदा हो गया है।

सूत्रों के अनुसार मप्र राज्य तिलहन उत्पादक सहकारी संघ की मई 2015 में गोदामों के भंडारण से प्राप्त होने वाले किराए तथा भवन, एयरटेल के टॉवर, मुंबई के भवन में पार्किंग के किराए से होने वाली करीब एक करोड़ पांच लाख रुपए होती थी। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा तिलहन संघ के सात गोदामों के किराए का रहता था, जो मई 2015 में लगभग 86 लाख रुपए आंकी गई थी। इस आय में लगातार कमी हो रही है। जुलाई 2017 में घटकर करीब 27 लाख रुपए रह गई है।

निगम ने गोदाम लेना बंद किए

तिलहन संघ के करीब पौने दो लाख मीट्रिक टन क्षमता के सात गोदामों का उपयोग नागरिक आपूर्ति निगम और राज्य भंडार गृह निगम करता है। इसमें वे विभिन्न् खाद्यान्न् व अन्य सामग्री का भंडारण करते हैं। नागरिक आपूर्ति निगम ने तो संस्था के गोदाम लेना ही बंद कर दिए हैं। भंडार गृह निगम गोदाम ले तो लेता है, लेकिन जितना वह इस्तेमाल करता है, सिर्फ उतने का किराया भुगतान करता है। उसे भी भंडारण में कर्मचारी लगाने होते हैं, क्योंकि तिलहन संघ के पास कर्मचारियों की कमी होने से वह उन्हें मदद नहीं कर पाता।

बढ़ता ही जा रहा बोझ

मई 2015 में गोदामों के भंडारण किराए से जो आय 86 लाख रुपए आती थी, वह जुलाई 2017 में घटकर 24 लाख रुपए पर सिमट गई है। यही नहीं, तिलहन संघ मुख्यालय से मिलने वाला किराया भी आधा हो गया है, क्योंकि भूतल पर लगने वाला पंचायत विभाग का एक कार्यालय भी यहां से शिफ्ट हो गया है। इसके अलावा संस्था पर सरकार ने स्थायी परिसमापक बैठाकर आर्थिक बोझ और बढ़ा दिया है।

आने वाले समय में दिक्कत होगी

गोदामों के किराए से लेकर अन्य आय में कमी हो रही है। आने वाले समय में तिलहन संघ के अधिकारियों व कर्मचारियों के वेतन लायक राशि निकाल पाना मुश्किल होगा।

– आरआर सिंह, संयुक्त पंजीयक और परिसमापक, तिलहन संघ

फैक्ट फाइल

कर्मचारियों की संख्या- 86

वेतन की राशि- करीब 22 लाख रुपए

ऑफिस और प्लांट के अन्य खर्चे- करीब दो लाख रुपए