छग को चार राज्यों से जोड़ने के लिए बनेंगे 5 नए रिंग रोड

रायपुर.देश के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर रोड प्रोजेक्ट ‘भारतमाला परियोजना’ में छत्तीसगढ़ को भी शामिल किया गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन विभाग ने इस महत्वाकांक्षी योजना के जरिए देश के नए आर्थिक क्षेत्रों को जोड़ने का लक्ष्य बनाया है। इसके तहत 28 नए रिंग रोड बनाए जाएंगे। छत्तीसगढ़ से होकर 410 किमी का आउटर रिंग रोड गुजरेगा, जो आंध्रप्रदेश, ओडिशा और बिहार के व्यापारिक और औद्योगिक शहरों को जोड़ेगा।
पीडब्लूडी के सचिव सुबोध सिंह ने बताया कि रायपुर से वर्तमान में गुजरने वाली तीन और बिलासपुर की दो रिंग रोड के अतिरिक्त ये नई सड़कें होंगी। दुर्ग से रायपुर-आरंग को जोड़ने के लिए 80 किमी की नई रिंग रोड बनेगी। यह दुर्ग और रायपुर के बाहर से निकलेगी और ओडिसा से जोड़ेगी।
इसके अलावे सरायपाली से मानिकपुर तक 33.65 किमी रिंग रोड बनेगा। उधर, बिलासपुर से उरगा-पत्थलगांव के रास्ते भी ओडिसा के कनेक्टिविटी दी जाएगी। इसके लिए 182 किमी लंबी रिंग रोड बनेगी।
इसी तरह रायपुर को आंध्रप्रदेश की पोर्टसिटी विशाखापट्टनम से जोड़ा जाएगा। नई रिंग रोड रायपुर से कुरुद-दुगली से ओडिशा होकर विशाखापट्टनम जाएगी। इसके लिए 114 किमी लंबी रिंग रोड बनाई जाएगी। इसके बन जाने से रायपुर से विशाखापट्टनम की दूरी 200 किमी कम हो जाएगी। इस नई सड़क के लिए छत्तीसगढ़ और आंध्र सरकार ने अपनी सहमति दे दी है। अब काम शुरू होने के लिए केवल ओडिशा से मंजूरी मिलना बाकी है।
रिंग रोड दूरी (किमी में)
दुर्ग-रायपुर 80
बिलासपुर-उरगा 77.40
उरगा-पत्थलगांव 105
सरायपाली-मानिकपुर 33.65
कुरुद-विशाखापट्टनम 114
उधर, रायपुर-बिलासपुर फोरलेन में देरी पर पीडब्ल्यूडी अफसर, ठेकेदार हाईकोर्ट में तलब
बिलासपुर से रायपुर तक बनाए जा रहे फोरलेन के काम में लेटलतीफी पर नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने पीडब्ल्यूडी के सचिव, इंजीनियर इन चीफ (ईएनसी), नेशनल हाईवे अथॉरिटी (एनएचए) के रीजनल अफसर और तीनों ठेका कंपनियों को हाईकोर्ट तलब किया है। 13 नवंबर को सुनवाई के दौरान सभी को शपथ पत्र के साथ बताने के लिए कहा गया है कि काम में लेटलतीफी क्यों हो रही है। सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर और जस्टिस अरविंद सिंह चंदेल की बेंच ने कोर्ट में मौजूद कई वकीलों से बिलासपुर से रायपुर तक की सड़क की हालत की जानकारी मांगी, तो ज्यादातर ने परेशानियों का जिक्र करते हुए बताया कि सड़क की खराब हालत के कारण पहुंचने में 5-6 घंटे तक लग रहे हैं। एग्रीमेंट के मुताबिक तीनों कंपनियों को अप्रैल-मई 2018 तक काम पूरा करना है।जबकि करीब 75-80 फीसदी काम बाकी है। ऐसे में निर्धारित समय तक काम पूरा हो पाना मुश्किल है।
सड़क बनाने के लिए तीन कंपनियों के साथ एग्रीमेंट किया गया था। रायपुर-बिलासपुर रूट पर सिक्सलेन व फोरलेन दोनों ही तरह की सड़कें बनाई जानी हैं। इस प्रोजेक्ट पर वर्ष 2012 से ही काम चल रहा है। कई बार इस सड़क का टेंडर विभिन्न विवादों की वजह से जारी करने के बाद निरस्त करना पड़ा। अंतिम टेंडर अक्टूबर 2015 में जारी किया गया। बार-बार प्रोजेक्ट अटकने की वजह से सड़क की लागत करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रुपए तक बढ़ गई है। अब 127 किमी की सड़क बनाने के लिए 1266 करोड़ रुपए खर्च होंगे। पहले यह प्रोजेक्ट 900 करोड़ रुपए का था। काम तीन हिस्सों में पूरा करवाया जाएगा। इसके तहत रायपुर-सिमगा, सिमगा-सरगांव और सरगांव से बिलासपुर तक की सड़क बनाने के लिए अलग-अलग टेंडर अवार्ड किया गया है। रायपुर से सिमगा तक 46 किमी तक की सड़क सिक्स लेन होगी। सिमगा से बिलासपुर तक करीब 79 किमी सड़क को फोरलेन बनाया जाएगा। काम की धीमी गति को लेकर रायपुर में रहने वाले रजत तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई है। इस पर पिछली कई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य शासन, नेशनल हाईवे अथारिटी और ठेका कंपनियों से जवाब-तलब किया है।
75 फीसदी से ज्यादा काम बाकी
एग्रीमेंट के मुताबिक तीनों कंपनियों को अप्रैल-मई 2018 तक काम पूरा करना है, लेकिन अब तक एक ही तरफ की सड़क ही बनाने का काम चल रहा है। एक तरफ की सड़क भी पूरी तरह नहीं बनाई जा सकी है। लोगों को एक तरह से कच्ची सड़क पर सफर करना पड़ रहा है। धूल की वजह से एकदम करीब की गाड़ियों को देखना भी मुश्किल हो रहा है। कई हादसे भी हो चुके हैं।