छत्तीसगढ़ के जंगलों में जी जान लगाकर बनी ‘न्यूटन’

राजकुमार राव अभिनीत फिल्म ‘न्यूटन” शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। इस फिल्म की कहानी अपने आप में बेहद अनोखी और काफी संवेदनशील है। यह नक्सलवाद के साए में मनाए गए लोकतंत्र के ऐतिहासिक पर्व की कहानी है। यह फिल्म सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि देश की सबसे ज्वलंत समस्या का एक सीधा समाधान है।

इसे छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में फिल्माया गया है। नक्सलियों से बिना डरे फिल्म में अहम किरदार निभाने वाले स्थानीय लोगों ने जी जान लगाकर दुनिया के सामने नक्सलवाद के खिलाफ कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी से लोकतंत्र की जंग जीतने की कहानी को पेश किया है। फिल्म शूटिंग के दौरान सुरक्षा के लिए फॉरेस्ट ऑफिसर, रेंजर सहित पुलिस बल मौजूद रहा, वहीं छग सरकार और प्रशासन ने भी पूरा सहयोग किया।

फिल्म ‘न्यूटन” में बस्तर के अबूझमाड़ क्षेत्र के एक ऐसे दुर्गम पोलिंग बूथ की कहानी दिखाई गई है, जहां पहुंचना काफी मुश्किल है। यहां सिर्फ 76 मतदाता हैं और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए की गई कवायदें दिखाई गई हैं। इस कहानी की पृष्ठभूमि पूरी तरह सच्ची है, सिर्फ किरदार काल्पनिक हैं।

कहानी में न्यूटन नाम के किरदार ने एक ऐसे सरकारी नौकर का चेहरा दिखाया है जो नक्सलवाद जैसी बड़ी समस्या का एकमात्र समाधान लोकतंत्र के पर्व यानी चुनाव और सुशासन को मानता है।

इस फिल्म की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह रियलिस्टिक महसूस होती है, क्योंकि इसमें राजकुमार राव, संजय मिश्रा और पंकज त्रिपाठी जैसे बड़े कलाकारों के साथ स्थानीय आदिवासियों ने काम किया है। ये ऐसे लोग हैं जिन्होंने जिन्दगी में कभी कैमरा फेस नहीं किया था।

फिल्म में गोंडी भाषा का प्रयोग

इस फिल्म में स्थानीय आदिवासियों की भाषा गोंडी का प्रयोग किया गया है। जंगल में मुनादी से लेकर इलेक्शन के दौरान ग्रामीणों को निर्देश देने के लिए इस भाषा का प्रयोग फिल्म में किया गया है। ऐसा पहली बार हुआ है जब बॉलीवुड की किसी फिल्म में स्थानीय आदिवासियों की भाषा सुनने को मिली है। इस फिल्म में नक्सल क्षेत्र में काम कर रहे एसपीओ और ग्रामीणों के बीच के संवाद गोंडी भाषा में हैं।

अनूठा रहा जिंदगी की सच्चाई को पर्दे पर जीने का अनुभव : खिरेंद्र यादव

फिल्म में कोंडागांव के रहने वाले खिरेंद्र यादव ने पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका निभाई है। उनके साथ ही बैलाडिला के मंगल कुंजाम, इशरार, मनधर, नीलधर, दुर्जन और सुकली जैसे स्थानीय युवाओं ने फिल्म में अलग-अलग किरदार निभाए हैं।

इन सब के लिए अपनी जिंदगी और परिस्थितियों की वास्तविक सच्चाई को पर्दे पर जीने का अनुभव बेहद यादगार रहा है। सभी फिल्मी पर्दे पर अब खुद को देखकर आत्ममुग्ध हो रहे हैं। स्थानीय लोगों के लिए भी अपने बीच के लोगों को फिल्मी पर्दे पर देखने का अहसास बेहद खास है।

ऐसे बनकर तैयार हुई यह खास फिल्म

मूलरूप से छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र के रहने वाले फिल्म अभिनेता दिनेश नाग ने दृश्यम फिल्म प्रोडक्शन कंपनी के प्रतिनिधियों को यहां फिल्म की लोकेशन तलाशने में मदद की। इसके साथ ही फिल्म निर्माताओं को यहां के वन मंत्री महेश गागड़ा का सहयोग मिला।

डेंस फारेस्ट की तलाश में यहां पहुंची फिल्म की यूनिट को मंत्री की टीम ने सहयोग करते हुए दल्ली राजहरा क्षेत्र में सेट स्थापित करने में मदद की। इसके साथ ही स्थानीय युवा सोमेश पात्रा के सहयोग से ग्रामीण भी फिल्म से जुड़े और इस फिल्म का निर्माण सफल हो पाया। फिल्म के निर्माता ने फिल्म के टाइटल में इस सहयोग के लिए वन मंत्री महेश गागड़ा का आभार भी जताया है।

रिलीज से पहले से ही अंतर्राष्ट्रीय चर्चा में फिल्म

फिल्म न्यूटन अपनी रिलीज से पहले से ही अंतर्राष्ट्रीय चर्चा बटोर रही है। कई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में विशेष प्रदर्शन के साथ ही फिल्म को कई अवॉर्ड्स भी प्राप्त हो चुके हैं। सिनेमा समीक्षकों ने फिल्म को रेटिंग में करीब साढ़े चार स्टार्स भी दिए हैं।

ऑस्कर में भारत की ओर से ‘न्यूटन” का नाम तय

रिलीज के साथ ही राजकुमार राव स्टारर फिल्म ‘न्यूटन” को बड़ी सफलता हाथ लगी है। ऑस्कर फिल्म समारोह में विदेशी सिनेमा सेक्शन के लिए भारत की ओर से ‘न्यूटन” की ऑफिशियल एंट्री होगी।

आपको बता दें कि, हर साल जूरी उस फिल्म को चुनती है, जो भारत की तरफ से ऑस्कर में ऑफिशियल एंट्री लेती है। इस बार ‘न्यूटन” का नाम तय हो गया है। इसको लेकर राजकुमार राव ने ट्वीट किया है, ‘मैं खुश हूं कि ‘न्यूटन” इस साल ऑस्कर के लिए भारत से ऑफिशियल एंट्री है”।

अमिताभ बोले- ‘न्यूटन” की कठोर सच्चाई देखने लायक है, ये आई ओपनर फिल्म

अमिताभ बच्चन ने राजकुमार राव की ‘न्यूटन” की तारीफ की है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा है- फिल्म न्यूटन देखी, इसकी कठोर सच्चाई देखने लायक है। सभी प्रकार से यह आई ओपनर फिल्म है।

हमारी ज्वलन समस्या देश-दुनिया तक पहुंचेगी

चुनाव और नक्सलवाद के विषय को लेकर फिल्मकार अच्छी मंशा के साथ फिल्म बनाना चाहते थे, जिसमें उन्हें यहां यथोचित सहयोग मिला। फिल्म को अंतर्राष्ट्रीय सराहना मिल रही है और इसके जरिए हमारी ज्वलन समस्या की मूल कहानी देश-दुनिया के लोगों तक पहुंचेगी। गोंडी भाषा और आदिवासी संस्कृति व हमारी वन संपदा से दुनिया रूबरू होगी। – महेश गागड़ा, वन मंत्री, छत्तीसगढ़

लोकतंत्र का हथियार ही है सबसे कारगर

फिल्म में नक्सल प्रभावित क्षेत्र की वास्तविक वस्तुस्थिति के साथ ही निष्पक्ष मतदान की महत्ता को प्राथमिकता से दिखाने की कोशिश की है। उम्मीद है फिल्म के विषय की तरह ही बस्तर में नक्सलवाद का जल्द खात्मा होगा और लोकतंत्र का हथियार ही कारगर साबित होगा।” – राकेश तोतला, निर्देशक