छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए 3 साल की आदिवासी लड़की को गर्भपात कराने की इजाजत दी है. हाईकोर्ट के जस्टिस संजय के अग्रवाल ने रेप की शिकार बच्ची के संबंध में पीड़िता के वकील रोहित शर्मा को एक मेडिकल रिपोर्ट जमा कराने का निर्देश दिया. साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता के ऑपरेशन का खर्च, दवा और इस दौरान उसके तथा उसके माता-पिता के यात्रा का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी.

कोर्ट ने निर्देश दिया कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर मेमोरियल हॉस्पिटल, रायपुर के डीन की अगुवाई में गर्भपात कराने की प्रक्रिया पर निगरानी रखेंगे. नारायणपुर जिले की रहने वाली बच्ची के साथ 4 लोगों ने रेप किया, गर्भवती हो जाने के बाद केस दर्ज कराया गया. 20 हफ्ते से ज्यादा का गर्भ होने के बाद किसी भी महिला का गर्भपात नहीं कराया जा सकता इससे महिला की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है.

पीड़िता की मां ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी बेटी का गर्भपात कराने की अनुमति मांगी थी. 31 जनवरी को हाईकोर्ट ने जगदलपुर मेडिकल कॉलेज को निर्देश दिया कि वह पीड़िता का परीक्षण कर रिपोर्ट यहां सौंपे. रिपोर्ट में कहा गया है कि गर्भपात कराया गया तो उम्र, गर्भधारण का समय और स्वास्थ्य को देखते हुए लड़की की जान को खतरा हो सकता है.