छत्तीसगढ़ में बढ़ रहा हाथियों का आतंक …

छत्तीसगढ़ में एक बड़ा गंभीर चिंता का विषय हों गया हे | राज्य में दिन प्रतिदिन हाथियों का आतंक बढ़ता जा रहा हे |अब तो जानवर ही नहीं इंसान भी इस प्रकोप से बचने का प्रयास कर रहे हे |प्राप्त जानकारी के अनुसार हाथियों का दल खेत में फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहा हे |छत्तीसगढ़, असम, झारखंड, ओडिशा, र्राज्यों में हाथी और इंसान के बीच वर्चस्व की लड़ाई बन रही हे |जिसका मुख्य कारण जंगल का समाप्त होना बताया जा रहा हे |हठी जंगल समाप्त होने के कारण अब रहवासी क्षेत्रो का रुख करने लगे हे |जीवित रहने के लिए इंसानी आबादी में सेंध लगाना हाथियों की मजबूरी को बयां कर रहा है। इस संघर्ष में दोनों ओर से जाने जा रही हैं।अक्टूबर से दिसंबर 2017 के बीच असम में 40 हाथियों की मौत का चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया। पूर्वी राज्यों से हर दूसरे दिन आ रही खबरें इस चिंता को लगातार बढ़ा रही हैं।हर दिन बढ़ रहा खूनी संघर्ष
छत्तीसगढ़ के 27 में से 17 जिले हाथियों के उत्पात से प्रभावित बताए जा रहे हैं। झारखंड के भी दर्जनभर जिले इससे प्रभावित हैं। भोजन की तलाश में हाथी खेतों एवं घरों तक पहुंच रहे हैं। जो भी उनके आगे आता है, उसे वे रौंद डालते हैं।पिछले पांच सालों में 199 लोगों और 60 हाथियों की मौत हुई। वहीं इसी अवधि में हाथियों ने करीब 7000 घरों को हाथियों ने तोड़ा व 32 हजार 9 सौ 52 हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचाया।प्रभावित परिवारों को 40 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा गया। 2017 में ही हाथियों के हमले में यहां 46 लोगों की मौत हुई। राजधानी रायपुर एवं इससे सटे इलाकों में भी हाथियों का झुंड पहुंचने लगा है।
इस तरीके से हो रहा बचाव:

हाथियों को जंगल में घेरे रखने के लिए कॉरीडोर बनाने से लेकर इलेक्ट्रिक फेंसिंग जैसे कुछ उपाय किए गए, लेकिन बात नहीं बनी। सरगुजा के वन्य क्षेत्र अधिकारी केके बिसेन के मुताबिक लोगों को जागरूक किए जाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं दिख रहा है।