छह करोड़ की प्रॉपर्टी का नहीं मिल रहा असली मालिक

आयकर विभाग ने बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम के तहत राजधानी में छह करोड़ रुपए की एक प्रॉपर्टी के संबंध में लोकायुक्त को जानकारी भेजी है। इस प्रकरण में पौने तीन एकड़ जमीन का असली मालिक सामने नहीं आया है। वहीं, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन का नामांतरण भी कर दिया गया। लिहाजा, मामले में शासन, पंजीयक एवं संबंधित तहसीलदार से भी जानकारी तलब की गई है।

आयकर विभाग ने इस प्रकरण को अपने बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम की धारा 26(3) के तहत पंजीबद्ध कर जमीन को ‘अटैच” करने के आदेश जारी कर दिए हैं। मामले में नोटिस भी भेजा गया है। आयकर एवं राजस्व विभाग के सूत्रों का कहना है कि भोपाल के कालापानी गांव में धीरू गौड़ के नाम से पौने तीन एकड़ जमीन खरीदी गई थी, लेकिन इस नाम का कोई भी व्यक्ति अब तक सामने नहीं आया।

आयकर विभाग ने मामले की जब तहकीकात की तो पता चला जमीन का सौदा वर्ष 2000 में हुआ था। उसके बाद 2013-14 में फर्जी कागजात के आधार पर उसका नामांतरण भी हो गया। रजिस्ट्री के वक्त दस्तावेजों पर न तो धीरू का फोटो लगा और न ही उसके दस्तखत हुए। वह रजिस्ट्रार ऑफिस भी नहीं पहुंचा।

पूछा- किसने खरीदी अजजा वर्ग व्यक्ति की जमीन

इस मामले में आयकर विभाग ने मामले का ब्योरा विशेष स्थापना पुलिस लोकायुक्त को दिया है, ताकि मामले की तह तक पहुंचा जा सके। आयकर ने राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव एवं कलेक्टर को भेजे पत्र में पूछा है कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के व्यक्ति की जमीन किसने खरीदी और इसके सत्यापन का क्या आधार था। तहसीलदार से भी पूछताछ की जा रही है। यह भी पूछा जा रहा है कि नामांतरण कब और किसने किया।