छात्र संघ चुनाव में हाथ से लिखे पोस्टर से ही कर पाएंगे प्रचार

प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में होने वाले छात्र संघ चुनाव के लिए सरगर्मी तेज हो गई है। छात्र संगठनों ने छात्रों को रिझाने के लिए अभियान छेड़ दिया है। इन सबके बीच चुनाव के लिए रोचक नियम-कायदे भी बनाए गए हैं। नियमों के पालन में छोटी सी चूक भी प्रत्याशी पर भारी पड़ सकती है और वह चुनाव की दौड़ से बाहर हो सकता है।

प्रत्याशी पांच हजार स्र्पए से ज्यादा की राशि खर्च नहीं कर पाएंगे। यही नहीं, वे अपना प्रचार-प्रसार भी छपे हुए पोस्टर और छपी हुई सामग्री से नहीं कर सकेंगे। अगर वे ऐसा करते हुए पाए जाते हैं तो उनकी उम्मीदवारी समाप्त की जा सकती है। प्रत्याशियों को केवल हाथ से लिखे पोस्टर के जरिए ही चुनाव प्रचार की इजाजत होगी। छात्र संघ चुनाव 30 अक्टूबर को होना है।

छात्रों ने सवाल उठाया है कि यह कैसे संभव है कि छात्र हाथ से पोस्टर बनाएं। सोचने वाली बात यह भी है कि छात्र ऐसे कितने पोस्टर बना पाएगा। यह बहुत ज्यादा समय लेने वाला काम है। इस कारण यह शर्त भी अव्यवहारिक है। कम से कम पंफलेट की अनुमति दी जानी चाहिए थी। प्रचार में कंप्यूटर प्रिंट आउट आधारित प्रचार सामग्री को भी प्रतिबंधित किया गया है। चुनाव की तैयारी कर रहे छात्रों का कहना है कि आजकल 50 पैसे में प्रिंट आउट निकल आता है। कम से कम इसकी अनुमति होना चाहिए थी।

वाहनों का प्रयोग भी नहीं

चुनाव में वाहनों का प्रयोग भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। कोई भी प्रत्याशी अपने वाहन पर भी हाथ से बना पोस्टर या झंडा लगाकर नहीं घूम सकता। इसी के साथ किसी को भी ध्वज झंडा बनाने,झंडा लगाने,सूचनाएं चिपकाने,नारे लिखने आदि के लिए किसी भी भूमि,भवन, दीवार आदि की संबंधित से अनुमति लेना होगी। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो संपत्ति विस्र्पण अधिनियम के तहत उस पर कार्रवाई की जाएगी और उसकी उम्मीदवारी निरस्त की जा सकती है।

मुफ्त भोजन भी नहीं

चुनाव में खड़े होने वाला प्रत्याशी छात्रों को मुफ्त भोजन में भी नहीं दे सकेगा। इसी के साथ किसी भी प्रकार की सामग्री का वितरण भी नहीं किया जा सकेगा। शिकायत और प्रमाण मिलने पर ऐसे प्रत्याशी की दावेदारी खत्म हो सकती है।

नियम अव्यावहारिक

छात्र संघ चुनाव में कई शर्त अव्यावहारिक हैं। यह सोचने वाली बात है कि कोई भी छात्र हाथ से पोस्टर कैसे बनाएगा और कितने बनाएगा। इससे सस्ती तो प्रिंटेड सामग्री पड़ती है।

– विवेक त्रिपाठी, प्रवक्ता, एनएसयूआई

बाजार में पंपलेट बहुत सस्ते में छपते हैं जबकि एक शीट ही पांच स्र्पए की आती है और पोस्टर बनाने में रंग का खर्चा अलग। ऐसी स्थिति में यह बहुत महंगी पड़ेगी। एक बार इस पर फिर विचार होना चाहिए और प्रिंटेड सामग्री राशि तय होना चाहिए।

– अभिषेक द्विवेदी, भगत क्रांति दल