जब गांधी जी ने ली परीक्षा और मैंने छू लिए उनके पैर

समाज कल्याण विभाग एवं सीनियर सिटीजन वेलफेयर फोरम के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को सीनियर सिटीजन सम्मान समारोह का आयोजन सर्किट हाउस में किया गया। अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में 250 से अधिक सीनियर सिटीजन का सम्मान किया गया।

इस दौरान कलेक्टर ओपी चौधरी ने 18 एकड़ में बन रहे ओल्ड एज होम के बारे में जानकारी दी। साथ ही वहां की जल्द ही दो और ओल्ड एज होम बनाए जाएंगे। साथ ही 100 एयर जिम भी बनाए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में सचिव सोनमणि बोरा ने सीनियर सिटीजन को दी जाने वाली सहायता के बारे में विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में सीनियर सिटीजन में ऐसे भी व्यक्ति मौजूद रहे, जिन्होंने गांधी जी के साथ अपने कुछ पल बिताए थे। उन्होंने नईदुनिया के साथ गांधी जी से जुड़े अपने कुछ अनुभव शेयर किए।

आजादी पर गांव में फहराया तिरंगा

फाफाडीह निवासी जगराम देवराम भाई चौहान 91 साल के हैं। बात उन दिनों की है, जब वे 19 साल के थे। उस वक्त वे सिलाग्राम आश्रम वर्धा में पढ़ाई करते थे। वे बताते हैं-मैं एक दिन आश्रम में जब रसोई में काम कर रहा था तो महात्मा गांधी अंदर आए और पूछने लगे- ये क्या कर रहे हो? इसमें लकड़ी कहां है, धुआं भी नहीं दिख रहा है।

दरअसल मैं नए ढंग से चूल्हा बनाकर उसमें काम कर रहा था। गांधी जी ने कई सवाल किए। मैंने सारे सवालों के जवाब दिए और उनके पैर भी छूए। ये सवाल वे परीक्षा लेने के लिए पूछ रहे थे, क्योंकि मैंने उनके ही टर्म से चूल्हा बनाया था।

उनके साथ मैं रोज सुबह-शाम घूमने जाया करता था और हमेशा उनसे आजादी की बात सुनता था। प्रार्थना में वे जो बात कहते थे, जिन्हें हमें तुरंत लागू करना होता था। आजादी के दिन मैंने अपने गांव में लोगों को इकठ्ठा करके झंडा लहराया।

जब उनकी हत्या हुई तो मैं अपने घर कच्छ कुंभारिया में था। जब ये बात सुनी तो बहुत दुख हुआ, सब कुछ सुन्न हो गया और उनके कही सारी बातें मेरे दिमाग में गूंजने लगीं। फिर 1953 में मैं रायपुर आ गया। गांधी जी की बातों को हमेशा याद करता हूं। उनका असर ही है कि मैं 1939 से खादी के कपड़े पहन रहा हूं।

गांधी को दिया जब एक पैसा

आईआईटी से 1995 में रिटा. शिक्षक मनमोहन लाल विश्वकर्मा बताते हैं कि 1942 की बात है। मैं ट्रेन से खड़गपुर से नागपुर जा रहा था। महात्मा गांधी से प्लेटफॉर्म में मिले। उस वक्त मैंने उन्हें एक पैसा दानस्वरूप दिया था। उन्हें देखकर बहुत अच्छा लगा, क्योंकि हम हमेशा उनके बारे में सुनते थे, पर उस दिन उनसे मुलाकात भी हुई थी।

हम हमेशा अप-अप यूनियन फ्लेग, डाउन-डाउन यूनियन जैक कहते हुए कांग्रेस के साथ मार्च निकाला करते थे। विश्वकर्मा बताते हैं कि रिटायर होने के बाद मैं रायपुर आ गया। यहां हीरापुर के ब्लाइंड स्कूल में कुछ दिन पढ़ाया। वहां मुझे बहुत खुशी मिलती है।

मुझे पढ़ाने से बहुत प्यार है। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि भगवान, अगले जन्म में भी मुझे शिक्षक बनाना। जिंदगी एंजॉय करते हुए जीनी चाहिए। ये आपके ऊपर है कि आप किस प्रकार जिंदगी का मजा लेते हैं। युवाओं को हर काम मजे के साथ करना चाहिए।