जर्मनी में मोदी-जिनपिंग के बीच मुलाकात की संभावना कम, चीनी विदेश मंत्रालय का बयान- वार्ता का माहौल नहीं

नई दिल्ली: जी20 सम्मेलन में भारत और चीन के बीच वार्ता की संभावना धूमिल होती दिख रही है. चीनी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि फिलहाल भारत के साथ द्विपक्षीय बातचीत का माहौल नहीं है और भारत के साथ बातचीत नहीं होगी.

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चीन ने आज कहा कि जर्मनी के हैम्बर्ग में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनिफंग की द्विपक्षीय वार्ता के लिए माहौल सही नहीं है. गौरतलब है कि दोनों देशों की सेना के बीच सिक्किम सेक्टर में गतिरोध चल रहा है।

मंत्रालय ने अपने दिए गए बयान में कहा है कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत का माहौल नहीं है. गौर हो कि जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान जर्मनी के हमबर्ग में होगी. पहले की रिपोर्ट में यह माना जा रहा था कि दोनों मिलकर सीमा पर बढ़ रहे तनाव को लेकर बात कर सकते हैं और इसे कम करने की कोशिश कर सकते हैं.

हैम्बर्ग में शुक्रवार से शुरू होगा जी20 शिखर सम्मेलन

हैम्बर्ग में कल से शुरू हो रहे जी20 शिखर सम्मेलन से पहले चीनी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच द्विपक्षीय वार्ता के लिए माहौल सही नहीं है. पीएलए की निर्माण शाखा द्वारा सड़क बनाने का प्रयास किये जाने के बाद चीन और भारत के बीच पिछले 19 दिनों से भूटान-चीन-भारत सीमा पर डोकलाम क्षेत्र में गतिरोध चल रहा है.इस क्षेत्र का भारतीय नाम डोक ला है जबकि भूटान इसे डोकलाम और चीन इसको डोंगलांग कहता है.खबरें थीं कि गतिरोध को खत्म करने के लिए दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हैम्बर्ग में बैठक हो सकती है.

आतंकवाद से मुकाबला और आर्थिक सुधार जैसे मुद्दों के छाए रहने की संभावना

आतंकवाद से मुकाबला और आर्थिक सुधार जैसे मुद्दों के 12वें जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान छाए रहने की संभावना है लेकिन साथ ही मुक्त और खुला व्यापार, जलवायु परिवर्तन, आव्रजन, सतत विकास और वैश्विक स्थायित्व जैसे विषयों पर भी चर्चा की संभावना है. इस्राइल की यात्रा के बाद हैम्बर्ग पहुंच रहे प्रधानमंत्री मोदी ने भारत से अपने प्रस्थान के पहले फेसबुक पोस्ट में कहा था कि वह अन्य जी20 देशों के नेताओं के साथ विश्व को आज के समय में प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों पर चर्चा को लेकर आशान्वित हैं जो आथर्कि प्रगति, सतत विकास और शांति एवं स्थिरता को प्रभावित करते हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विश्वभर के नेता पिछले साल हांगझोउ सम्मेलन में लिए गये फैसलों की प्रगति की समीक्षा करेंगे और आतंकवाद, जलवायु, सतत विकास, प्रगति और व्यापार, डिजिटलीकरण, स्वास्थ्य, रोजगार, आव्रजन, महिला सशक्तीकरण तथा अफ्रीका के साथ साझेदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

उन्होंने साथ ही कहा था कि वह आपसी हितों के द्विपक्षीय मुद्दों के आदान-प्रदान के लिए सम्मेलन से इतर नेताओं से मुलाकात के अवसर को लेकर आशान्वित हैं. मर्केल द्वारा विश्व नेताओं के स्वागत के साथ सम्मेलन की शुरुआत होगी. इसके बाद जी20 लीडर्स रिट्रीट होगा, जिसमें चर्चा का विषय है आतंकवाद से मुकाबला. इस सम्मेलन के पहले कार्य सत्र में वैश्विक प्रगति और व्यापार  एवं दूसरे सत्र में सतत विकास, जलवायु और उर्जा विषयों पर चर्चा होगी.विश्वभर के नेता कल एक संगीत कंसर्ट में हिस्सा लेंगे.इसके बाद उनके और उनके जीवनसाथियों के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया जाएगा. सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरआत तीसरे कार्य सत्र से होगी. इस सत्र में अफ्रीका के साथ साझेदारी, आव्रजन और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी.चौथे सत्र में डिजिटलीकरण, महिला सशक्तीकरण और रोजगार पर चर्चा होगी. शनिवार को समापन सत्र होगा.इसके बाद जी20 नेताओं की ओर से संयुक्त बयान जारी किया जाएगा।

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भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है

इन दिनों भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. सिक्किम से सटी चीन की सीमा पर भारत और चीन के बीच काफी समय से तनाव चल रहा है. इसी बीच भारत ने डोका ला इलाके में और अधिक सैनिकों की तैनाती भी कर दी है.

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पहली बार भारत और चीन के बीच इतना लंबा गतिरोध बना हुआ है

1962 के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है, जब किसी इलाके को लेकर भारत और चीन के बीच इतना लंबा गतिरोध बना हुआ है. पिछले लगभग महीने भर से डोका ला इलाके में दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने हैं. भारत की तरफ से इस इलाके में और अधिक सैनिकों को तैनात किया गया है. हालांकि, इन सैनिकों को नॉन-कॉम्बैटिव मोड में तैनात किया गया है.  नॉन कॉम्बैटिव मोड को गैर लड़ाकू स्थिति भी कहते हैं, जिसमें सैनिक अपनी बंदूकों की नाल को जमीन की ओर रखते हैं.

डोका ला इलाके में भारत की सेना कई सालों से गश्त कर रही है

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने पिछले दिनों कहा था कि  ‘भूटान को भारतीय सैनिकों के डोका ला में घुसने से पहले जानकारी नहीं थी.’ वह भारत के बयान का खंडन करने की कोशिश कर रहे थे जिसमें भारत ने कहा था कि 16 जून को रॉयल भूटान आर्मी ने डोका ला में पीपल्स लिबरेशन आर्मी के निर्माण कार्य का विरोध किया था. भारतीय सेना इसके दो दिन बाद भूटान के समर्थन में खड़ी हुई थी.

डोका ला इलाके में भारत की सेना कई सालों से गश्त कर रही है

डोका ला इलाके में भारत की सेना कई सालों से गश्त कर रही है. 2012 में सेना ने यहां पर दो बंकर बनाने का फैसला किया था. 1 जून को चीन की सेना की तरफ से इन बंकरों को हटाने की चेतावनी दिए जाने के बाद 6 जून की रात को चीन के 2 बुल्डोजरों ने इन बंकरों को नष्ट कर दिया. चीन का दावा है कि वह उनका इलाका है, जिस पर भारत या भूटान का कोई हक नहीं है.