जाति पूछने पर कमलनाथ का जवाब, राजनीति मेरे लिए समाजसेवा, मेरी जाति हिंदुस्तानी

भोपाल.राजनीति मेरे लिए समाजसेवा है और मेरी जाति हिंदुस्तानी है। ये बात कमलनाथ ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही। पत्रकारों द्वारा उनकी जाति पूछने पर उन्होंने ये जवाब दिया। काॅन्फ्रेंस के दौरान कमलनाथ ने एक बार फिर बीजेपी और प्रदेश की शिवराज सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने प्रदेश सरकार के विकास के दावों को झूठा करार देते हुए हर वर्ग के सरकार से दुखी बताया।

– बता दें कि कमलनाथ के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से आगामी चुनाव को लेकर कांग्रेसियों के उत्साह देखने को मिल रहा है। कांग्रेस लगातार प्रदेश सरकार पर हमला कर रही है। नए प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ तो लगातार प्रेस काॅन्फ्रेंस कर रहे हैं। रविवार को भी उन्होंने पत्रकारों से चर्चा कर सरकार पर निशाना साधा था।

– सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार विकास के दावे कर रही है, लेकिन प्रदेश की तस्वीर सबके सामने हैं। प्रदेश के जो हालात आज हैं, इतने वर्षों में मैंने पहले कभी नहीं देखा। आज हर वर्ग सरकार की नीतियों से परेशान है, चाहे वह मजदूर हो किसान हो, महिलाएं हों या फिर नौजवान या नौकरी पेशा।

– हमारे प्रदेश का विकास कृषि पर निर्भर है। प्रदेश के 75 फीसदी लोग किसी ना किसी माध्यम से कृषि से जुड़े हुए हैं। यदि हम किसानों को दुखी करेंगे तो प्रदेश के विकास की गति प्रभावित होगी। सरकार विज्ञापनों के जरिए विकास के दावे कर रही है, लेकिन उसके उलट जमीनी हकीकत कुछ और है।

– सीएम शिवराज पर निशाना साधते हुए नाथ ने कहा कि मेरा संबंध ना डंपर से है ना व्यापमं, रेत के अवैध उत्खनन या शराब से। मेरा राजनीतिक जीवन एक खुली किताब की तरह है। मेरा राजनीतिक जीवन सेवा के लिए है, अब तक मुझे वोट के जरिए जनता का प्यार मिला है। पहले छिन्दवाड़ा मेरा मिशन रहा, अबएमपी मेरा मिशन है

मप्र महिला अपराध में नंबर वन, सीएम खुद को मामा कहते हैं

– कमलनाथ ने कहा कि अब सीएम द्वारा की जाने वाली घोषणाओं का समय खत्म हो गया है, अब हिसाब-किताब का समय आ गया है। प्रदेश महिला अपराध में नंबर वन पर है और हमारे सीएम खुद को मामा कहते हैं। एक ओर वे खुद को किसान का बेटा कहते हैं और दूसरी ओर किसान मर रहा है। सीएम हर साल कषि पुरुस्कार ले रहे हैं, लेकिन ये किस बात का पुरुस्कार ले रहे हैं। यदि प्रदेश में उत्पादन बढ़ा तो खरीदी की कोई व्यवस्था क्यों नहीं की गई।  चेहरे पर नहीं संगठन पर चुनाव लड़ने की बात कहते हैं, लेकिन कांग्रेस चेहरे पर चुनाव लड़ेगी। हम किसानों, युवाओं और बेरोजगारों के चेहरे पर चुनाव लड़ेंगे।