जाने, कैसे जैन गुरु ने अपने रिश्तेदार को सही राह दिखाई

जैन गुरु रयोकान को उनकी बहन ने किसी जरूरी बात करने के लिए घर आने का निमंत्रण दिया। रयोकान जब अपनी बहन के घर पहुंचे तो उनकी बहन ने उनसे कहा कि ‘ अपने भानजे को समझाओ वह कुछ काम नहीं करता है। इधर- उधर घूमता रहता है और अपने पिता के धन को बर्बाद कर देगा। केवल आप ही उसको सही राह पर ला सकते हैं। ‘

इसके बाद रयोकान अपने भानजे से मिले। भानजा भी अपने मामा से मिलकर बहुत प्रसन्न हुआ। रयोकान के सन्यास लेने से पहले दोनों ने लंबा समय साथ में गुजारा था इसलिए भानजा जल्द ही इस बात को समझ गया कि रयोकान उसके पास क्यों आए हैं। उसको यह आशंका थी कि उसके व्यवहार के कारण रयोकान उसको डांट पिलाएंगे, लेकिन इसके विपरीत रयोकान ने उसको कुछ भी नहीं कहा। अगली सुबह जब रयोकान का वापस जाने का समय हो गया तो वह अपने भानजे से बोले कि ‘ क्या तुम मेरी जूती के बंध बांधने में मेरी मदद करोगे? मुझसे अब झुका नहीं जाता और मेरे हाथ भी कांपते हैं। ‘

भानजे ने बड़ी खुशी- खुशी रयोकान की जूतियों के फीते बांध दिए।

‘ शुक्रिया ‘, रयोकान ने कहा, ‘ दिन-प्रतिदिन आदमी बूढ़ा और कमजोर होता जाता है। तुम्हे याद है मैं कभी कितना बलशाली और कठोर हुआ करता था। ‘

‘ हां , भानजे ने कुछ सोंचते हुए कहा, लेकिन अब आप बहुत बदल गए हैं। ‘

भानजे के भीतर कुछ जाग रहा था। उसको यह लगने लगा था कि उसके रिश्तेदार, उसकी मां और शुभचिंतक अब बुजुर्ग हो गए हैं। उन सभी ने उसकी बचपन में काफी देखभाल की थी इसलिए उनकी देखभाल की जिम्मेदारी अब उसकी है। इस बात का अहसास होते ही उसने उस दिन से सारी बुराइयां छोड़ दी और अपने परिवार और खुद की भलाई में जुट गया।