डेंटल कॉलेज स्कैंडल में जांच शुरू नहीं, विक्टिम फिर करेेगी शिकायत

रायपुर.डेंटल कॉलेज स्कैंडल की जांच शुरू नहीं होने से नया बवाल खड़ा हो गया है। त्योहार तक खामोश बैठने के बाद पीड़िता डाक्टर दोबारा महिला आयोग में शिकायत करेगी। आयोग ने भी सख्त रवैया अपना लिया है। चिकित्सा शिक्षा संचालक को दोबारा नोटिस भेजकर पूछा जाएगा कि उन्होंने अब तक जांच क्यों नहीं शुरू करवायी। इससे इतने बड़े स्कैंडल की निष्पक्ष जांच को लेकर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।
आयोग की अध्यक्षा हर्षिता पांडेय भी इस मामले को लेकर बरती जा रही लापरवाही से हैरान हैं। उनका कहना है इतने गंभीर मामले की जांच शुरू नहीं होना आश्चर्यजनक है। वे इस मामले में चिकित्सा शिक्षा संचालक कार्यालय को नोटिस भेजकर जवाब मांगेंगी। इधर प्राचार्य डा. बिश्वजीत मिश्रा पर अश्लील बर्ताव और बातें करने का आरोप लगाने वाली महिला डाक्टर भी निराश हो गई हैं। उनका कहना है कि अब वे इंसाफ के लिए एक बार फिर आयोग में शिकायत करेंगी। डाक्टर का कहना है कि एक चिकित्सक के साथ इस तरह का बर्ताव हो रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर जांच तक शुरू नहीं की गई। ऐसे में उनके साथ किस तरह इंसाफ हो सकेगा।
डेंटल कॉलेज की महिला डाक्टर के बाद 14 और डाक्टरों ने प्राचार्य के खिलाफ लिखित शिकायत कर उनके बर्ताव के बारे में जांच की मांग की थी। इन 14 डाक्टरों में 8 महिला डाक्टर थीं। एक तरह से कॉलेज के ज्यादातर डाक्टरों ने खुलकर शिकायत की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने से वे भी हैरान हैं। इस मामले को लेेकर स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों की खामोशी भी कई तरह के सवाल खड़े कर रही है।
पहली शिकायत कॉलेज में की जा चुकी रफा-दफा
पीड़ित महिला डाक्टर ने सितंबर में कॉलेज की महिला उत्पीड़न समिति से शिकायत की थी, लेकिन उनकी उस शिकायत को कॉलेज स्तर पर ही रफा-दफा कर दिया गया। उन्होंने इस बारे में चिकित्सा शिक्षा संचालक कार्यालय को भी सूचित किया था, लेकिन वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। उसके बाद निराश होकर महिला डाक्टर ने आयोग में अर्जी दी।
कॉलेज में सन्नाटा, स्टाफ भीआपस में नहीं कर रहे बातें
डेंटल कॉलेज के प्राचार्य के स्कैंडल में फंसने के बाद कॉलेज का माहौल बदल गया है। कॉलेज के ज्यादातर डाक्टर आपस में बातें नहीं कर रहे हैं। प्राचार्य के कक्ष में भी डाक्टर जरूरी काम होने पर ही जा रहे हैं। महिला डाक्टरों की खासतौर पर उनकी जिन्होंने शिकायत की है, स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। भास्कर ने पड़ताल के दौरान देखा कि सभी शिकायत करने वाले डाक्टर चुपचाप ड्यूटी कर रहे हैं। उनके सामने पैरामेडिकल स्टाफ भी बोलने से बच रहा है।
15 दिन का टाइम दिया था, कमेटी बनाने में 12 दिन गुजरे
डेंटल कॉलेज की महिला प्राचार्य की शिकायत के बाद महिला आयोग ने चिकित्सा शिक्षा विभाग से 15 दिन में जांच रिपोर्ट मांगी थी। 15 दिन में 12 दिन गुजर चुके हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग अब तक इस मामले में जांच तक शुरू नहीं कर सका है। इससे आयोग की नोटिस के औचित्य पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। महिला डाक्टरों का कहना है कि अफसर आयोग को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, ऐसे में इंसाफ की उम्मीद कैसे पूरी होगी।