तमिलनाडु में MBBS की फीस करीब 2 करोड़ रुपये

तमिल नाडु के निज़ी कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई का खर्च दोगुना हो गया है। अब छात्रों को एमबीबीएस के लिए करीब 2 करोड़ रुपये तक खर्च करने होंगे।
 सीबीएसई द्वारा 17 अगस्त को नैशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (एनईईटी-नीट) के रिजल्ट जारी करने के बाद तमिल नाडु के निज़ी मेडिकल कॉलेजों और डीम्ड यूनिवर्सिटियों ने एमबीबीएस की फीस बढ़ा दी है। किसी नामी कॉलेज में पढ़ाई का लगभग खर्च 1.85 करोड़ रुपये लगेंगे जिसमें 1 करोड़ रुपये तक ट्युइशन फीस और 85 लाख रुपये कैपिटेशन फीस होगी। उदाहरण के तोर पर चेन्नै स्थित एसआरएम मेडिकल कॉलेज की फीस इस साल 21 लाख रुपये हो गई है जिसमें 2 लाख रुपये डिवेलपमेंट शुल्क और 1 लाख रुपये करिक्युलम शुल्क है। 2014 में इसकी ट्युइशन फीस 9 लाख रुपये थी और 2015 में 10 लाख रुपये। अन्य कॉलेजों में ट्युइशन शुल्क 12 से 18 लाख रुपये के बीच है, जो साढ़े पांच साल के कोर्स के लिए करीब 1 करोड़ रुपये हो जाएगी।
 सभी प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों और डीम्ड यूनिवर्सिटियों के लिए छात्रों को सिर्फ मेरिट के आधार पर दाखिला देना अनिवार्य कर दिया गया है। नविन नियम के अनुसार, छात्र स्वतंत्र रूप से अलग-अलग कॉलेजों में आवेदन कर सकेंगे लेकिन दाखिला नीट रैंक्स के आधार पर ही होगा।
 फिर भी, कुछ कॉलेजों ने पैरंट्स से कहा है कि उनको कैपिटेशन फीस 40 लाख रुपये से 85 लाख रुपये के बीच अदा करनी होगी। तीन निज़ी यूनिवर्सिटियों में अपनी बेटी के दाखिले के लिए गए एक पैरंट ने बताया, ‘मैंने उनको तर्क दिया कि दाखिला मेरिट के आधार पर होना चाहिए, लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया है।’
 दाखिले की पारदर्शी मेरिट सूचि के अभाव में जहां कुछ पैरंट कॉलेजों से बहस नहीं कर पाते हैं वहीं ज्यादातर ने कहा कि वे साढ़े पांच साल के कोर्स के लिए सालाना ट्युइशन शुल्क अदा नहीं कर पाएंगे।

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