तीन तलाक बिल लोकसभा में पास, पीछे रहा विपक्ष …

देश का बहुचर्चित मामला “ट्रिपल तलाक” का बिल कल भारी बहुमत के साथ लोकसभा में पास हो गया। अब इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। राज्यसभा से पास होने के बाद यह बिल कानून का रूप ले लेगा जिसके बाद किसी भी मुस्लिम महिला को आसानी से तीन तलाक देकर अलग नहीं किया जा सकता है। ऐसा करने पर इसे अपराध माना जाएगा और इसके लिए नए कानून के तहत सजा दी जाएगी| वही पर कानून मंत्री जी का कहना हे की जिन मुस्लिम महिलाओं के साथ अपराध हो रहा है हम उनके साथ खड़े हैं और अगर यह अपराध है तो हम यह अपराध 10 बार करेंगे। लोकसभा में तीन तलाक का बिल पेश किए जाने से पहले पार्टी के संसदीय दल की बैठक में केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक प्रेजेंटेशन के जरिये विस्तार से तीन तलाक बिल की बातें भाजपा सांसदों के समक्ष रखी थी। हालांकि देर शाम बिल लोकसभा में पास होते ही सरकार के हौसले और बुलंद हो गए। लोकसभा में बिल पेश करते वक्त ने इसे ऐतिहासिक बिल करार देते हुए महिला सशक्तिकरण के लिए बड़ा कदम बताया। इस बीच भाजपा ने अंदरूनी स्तर पर यह रणनीति बनाई है कि वह सदन के बाहर तीन तलाक बिल को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करेगी।
कानून मंत्री जी के भाषण के कुछ मुख्य बिंदु :
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि निकाह कराने वाले मौलवी शौहर और बीवी को सलाह देंगे कि तलाक के लिए एक साथ तीन बार इस शब्द के इस्तेमाल से वे बचेंगे।
सुप्रीम कोर्ट को दिए हलफनामे में कहा गया था कि पर्सनल लॉ बोर्ड मुस्लिम समुदाय को एक साथ तीन तलाक न बोलने के लिए समझाएगा। इसके बावजूद इस तरह के तलाक की संख्या 2017 में 300 तक पहुंच गई।
अधिकतर इस्लामी देशों में एक साथ तीन तलाक को रेगुलेट करने के लिए कानून है। इनमें बांग्लादेश, मलेशिया, इंडोनेशिया और पाकिस्तान भी है।
अधिकतर इस्लामी देशों में यदि तलाक देना है तो पहले आर्बिट्रेशन काउंसिल को तलाक देने की वजह बतानी पड़ती है। ऐसे में मुस्लिम समाज में सुधार के लिहाज से देखें तो भारत कहीं पीछे रह गया है।