तेदमंता अभियान से दर्जनों गांवों में नक्सली आवाजाही बंद

छत्तीसगढ़ के सबसे खतरनाक माने जाने वाले नक्सल जोन में पुलिस नाच-गाकर ग्रामीणों का विश्वास जीतने में सफल हो रही है। दोरनापाल-जगरगुंडा के बीच बसे गांवों में नक्सलियों की सरकार चलती थी।

दोरनापाल के एसडीओपी विवेक शुक्ला ने एक कला जत्था दल बनाने की योजना बनाई जिसमें एसपी और अन्य अफसरों की सहमति मिल गई। गोंडी भाषा में आदिवासियों की समस्या से संबंधित मनोरंजक प्रस्तुतियां तैयार की गईं। शुरू में दिक्कत आई लेकिन धीरे धीरे ग्रामीण जुटने लगे।

साल भर बाद तेदमंता अभियान का असर यह हुआ है कि धुर नक्सल प्रभावित दर्जनों गांवों में नक्सलियों की आवाजाही बंद हो गई है। इस इलाके के दर्जनों गांवों में पुलिस ने शो किए। कभी ग्रामीणों से यह नहीं पूछा कि क्या गांव में नक्सली आते हैं। या कब आए थे।

इस दल ने ग्रामीणों से बात की और उनकी समस्याएं जानीं। जो परेशानियां बताई गईं उन्हें आवेदन बनाकर कलेक्टर को दिया गया। प्रशासन ने समस्या दूर की। जो बीमार थे उन्हें दवाइयां दी गईं। जिस जमीन पर पहले सलवा जुड़ूम अभियान चला था उसमें अब तेदमंता अभियान चलाया जा रहा है।

जुड़ूम के समय ग्रामीण पुलिस को देखकर भाग जाते थे, अब खुद पुलिस को अपनी बैठकों में बुला रहे हैं। मेड़वाही, पालामड़गू, कोर्रापाड़, अरलमपल्ली जैसे गांवों में पहले नक्सली दिन में आते-जाते रहते थे। अब पुलिस का दखल बढ़ा तो नक्सलियों को अपने कदम खींचने पड़े हैं। कुछ दिन पहले पोलमपल्ली में ग्रामीणों ने बैठक बुलाई तो उसमें पुलिस को भी बाकायदा सूचना देकर आमंत्रित किया। बैठक में गांव की समस्याओं पर चर्चा हुई।

हर गांव में की है मारपीट, ग्रामीणों में है गुस्सा

तेदमंता अभियान में काम कर रहे जवानों ने बताया कि नक्सलियों ने इस इलाके में हर गांव में आदिवासियों से मारपीट की है। वे दबाव और दहशत बनाकर अपना राज चलाना चाहते हैं। पुसवाड़ा, कांकेरलंका, गगनपल्ली, गोरगुंडा जैसे गांवों में उन्होंने जन अदालत लगाकर ग्रामीणों की पिटाई की। कोर्रापाड़ के 12 परिवारों को हाल ही में उन्होंने उनकी जमीन से बेदखल कर भगा दिया है। इन सबसे ग्रामीणों में गुस्सा है।

क्या करती है पुलिस

पुलिस ग्रामीणों को समझाती है कि वे आपसे हर बात का टैक्स लेते हैं। बदले में आपको क्या मिला। बल्कि वे आपको मारते भी हैं। पुलिस की इस रणनीति का असर हुआ। बुरकापाल, चिंतलनार समेत कई बैठकों में ग्रामीणों ने यह गुस्सा व्यक्त भी किया। लेकिन तेदमंता दल के सदस्यों ने उनसे यही कहा कि अपना विकास आपको ही करना है। सरकार आपकी मदद को तैयार है। अब ग्रामीण नलकूप के लिए आवेदन लगा रहे हैं।