तैयार होगी हाउसिंग सोसायटियों की कुंडली, पोर्टल पर मिलेगी सदस्य, प्लॉट आवंटन सहित सभी जानकारी

कार्यकलापों और सदस्यों को प्लॉट बांटने में पारदर्शिता लाने के लिए सहकारिता विभाग, गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं की कुंडली बनाने जा रहा है। इसी सिलसिले में हाउसिंग संस्थाओं की समग्र जानकारी मांगी गई है जो पोर्टल पर दर्ज होगी।

संस्थाओं से तय प्रारूप में पूछा गया है कि संस्था के पास कितनी जमीन है? कितने सदस्यों को प्लॉट बांट दिए गए हैं और कितने बाकी हैं? संस्थाओं को अपने बैंक खातों की डिटेल भी देना होगी। कई संस्थाओं में पर्दे के पीछे कॉलोनाइजर और भू-माफिया हैं, लेकिन कागज पर उनके ही कर्मचारी या नौकर पदाधिकारी बना दिए गए हैं।

ऐसे में संस्था के अध्यक्ष और प्रबंधक की भी डिटेल मांगी गई है। अध्यक्ष और प्रबंधक का अता-पता, मोबाइल नंबर, कार्यभार ग्रहण करने की तारीख, व्यवसाय, आधार नंबर और पैन भी पूछे गए हैं। सहकारिता आयुक्त के निर्देश पर उपायुक्त के पाटनकर ने सभी हाउसिंग संस्थाओं को जानकारी का प्रारूप भेजकर नोटिस जारी कर किए हैं।

ये जानकारी भी देना होगी

– सोसायटी का नाम और कब पंजीयन हुआ?

– सोसायटी के कार्यालय का पता। कार्यालय भवन पर स्वामित्व किसका? यदि किराये का भवन है तो भवन स्वामी का नाम।

– सोसायटी का अंतिम ऑडिट कब हुआ? ऑडिट टीप और लेखा वर्ष।

– सोसायटी से संपर्क स्थापित करने के लिए प्राधिकृत अधिकारी या व्यक्ति का नाम, पता और मोबाइल नंबर।

– सोसायटी के खाते किन-किन बैंकों में हैं। बैंक शाखा का नाम, खाता नंबर, आईएफएससी कोड और 31 अगस्त, 2017 पर खाते का बैलेंस।

– सोसायटी में कुल सदस्य कितने हैं? कितने सदस्यों ने भूखंड या भवन के लिए आंशिक और कितने सदस्यों ने पूरी राशि जमा की है।

– कितने सदस्यों ने 31 जुलाई, 17 तक सदस्यता से त्याग-पत्र दिया गया। पात्र सदस्य कितने हैं।

– सोसायटी में कितनी भूमि उपलब्ध है? भूमि का पूरा पता, तहसील, पटवारी हल्का नंबर, सर्वे नंबर और पहचान स्थल।

– सोसायटी को शासकीय भूमि मिली या निजी भूमि खरीदी गई है। भूमि का प्रयोजन आवासीय है या कृषि।

– सोसायटी द्वारा निजी भूमि खरीदी गई है तो किस तारीख में रजिस्ट्री कराई गई और रजिस्ट्री का नंबर।

– कलेक्टर गाइड लाइन से जमीन की कीमत कितनी है। कितनी राशि का भुगतान किया गया।

– सोसायटी की आवासीय योजना का नाम, पता। नगर तथा ग्राम निवेश से कब अनुमति मिली और नंबर।

– जमीन के डायवर्शन और कॉलोनाइजर लाइसेंस की जानकारी।

– कॉलोनाइजर लाइसेंस और विकास अनुज्ञा जारी करने वाले सक्षम प्राधिकारी।

– विकास अनुज्ञा और रेरा का पंजीयन क्रमांक।

– यदि किसी संस्था की जमीन इंदौर विकास प्राधिकरण की किसी योजना में आ चुकी है तो प्राधिकरण को भेजी गई सदस्यों की वरीयता सूची।

– संस्था की कॉलोनी में सड़क, बिजली, पानी की क्या व्यवस्था। कितने काम पूरे, कितने अूरे।

– कॉलोनी के डेवलपर या कांट्रैक्टर का नाम-पता। आधार नंबर, पैन। संपर्क का पता और फोन व मोबाइल नंबर।

– कॉलोनी विकास के लिए अधिकृत कंपनी के बैंक खातों की भी जानकारी।