दंपति ने घर में छापे 5 करोड़ के नोट, ऐसे लगाया कंपनियों को 65 लाख का चूना

रायपुर। असफलताओं के बाद निखिल को उसके दिल्ली के एक दोस्त ने नकली नोट छापने का आइडिया दिया था। निखिल और पूनम ने नोटों का वीडियो बनाया। मल्टीनेशनल कंपनियों के ब्रोकरों को वीडियो दिखाकर यह भरोसा दिलाते थे कि उनके पास बड़ी रकम है। लिहाजा सीएसआर मद की रकम उनके एनजीओ को देने में संकोच न करें। वे बीस फीसद रकम काटकर शेष 80 फीसद एक नंबर में वापस लौटा देंगे। वे 7 से 8 कंपनियों के संपर्क में थे। पूनम ही ब्रोकर्स से बात करती थी। दंपती ने आठ कंपनियों को झांसा देकर 65 लाख रुपये की ठगी की है।

पुलिस की दबिश के बाद ‘ टीम रविवार शाम को रजत प्राइम पहुंची। मौके पर मिले गार्ड ने बताया कि दंपती सुबह जल्दी जाते थे और कई बार तो देर रात को आते थे या आते ही नहीं थे। पड़ोसियों को निखिल के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है। क्योंकि वह जब भी आता, घर में ही रहता था।

दंपती खाना भी घर में नहीं पकाते थे,बाहर से ही आता था। टिफिन वाले का छह हजार रुपये बकाया है। वह पैसा मांगने आया था। इनके पास एक मोपेड थी, इसके अतिरिक्त कोई दूसरी गाड़ी नहीं। फ्लैट का किराया सात हजार रुपये है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस प्रकरण में एक व्यक्ति फरार बताया जा रहा है, जबकि दो अन्य को पुलिस ने गवाह बना लिया है।

अमलीडीह में नकली नोट का कारखाना संचालित होने की सूचना शनिवार शाम को एसएसपी अमरेश मिश्रा को मिली। उन्हें नोटों का एक वीडियो भी सूचना देने वाले ने भेजा था। एसएसपी ने इसके एक घंटे के भीतर क्राइम ब्रांच की पांच विशेष टीम गठित की। इन्होंने दंपती के हर एक मूवमेंट पर नजर रखनी शुरू की।

मॉल से लेकर अपार्टमेंट तक में नजर रखी गई। अंत में घर से इनकी गिरफ्तारी हुई। इस दौरान पूनम ने पुलिसवालों के साथ हुज्जत भी की। पुलिस अंदर दाखिल हुई, किचन से नोट बरामद किया। पुलिस ने महीने भर का सीसीटीवी फुटेज जब्त किया है। घर सील कर दिया गया है।

निखिल की पटना से रायपुर तक की पूरी कहानी-

बिहार के छपरा जिले के किराडी गांव, थाना डेरनी से आइएएस बनने का सपना लेकर यूपीएससी की कोचिंग के लिए दिल्ली गए निखिल की किस्मत हर जगह दगा देती गई। यूपीएससी की परीक्षा में असफल होने पर वह नौकरी की तलाश में रायगढ़ पहुंचा। वहां एक अखबार के दफ्तर में काम किया।

यहीं दफ्तर में काम करने वाली पूनम अग्रवाल से निखिल की नजदीकियां बढ़ीं और साल भर पहले दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली। अखबार का काम छोड़ दंपती रायपुर पहुंच गया। निखिल ने आइसीआइसीआइ बैंक सीएससी सेंटर का फ्रेंचाइजी लेकर पिरारी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कंपनी खोली। कंपनी उसने पत्नी पूनम अग्रवाल के साथ मिलकर शुरू की। यहां भी सफलता नहीं मिली, तो इन्होंने ठगी का रास्ता पकड़ लिया।

हाईप्रोफाइल है निखिल का ससुराल पक्ष-

दंपती के प्रोफाइल को खंगाला तो पता चला कि पूनम बिलासपुर के हाईप्रोफाइल परिवार से ताल्लुकात रखती है। उसके पिता की बिल्हा में पेट्रोल पंप और राइस मिल है। पूनम ने घरवालों की मर्जी के बगैर निखिल से शादी की। निखिल का ससुराल वालों से कम ही संबंध था।

हाइटेक तरीके से लगाया कंपनियों को चूना-

दंपती का ठगी करने का तरीका हाइटेक था। दरअसल दोनों फंड आवंटित करने वाली कई राज्यों की बड़ी कंपनियों को ऑफर देते थे कि उनके पास रजिस्टर्ड एनजीओ है। अगर सीएसआर का फंड दिया जाता है तो इसके एवज में वो 20 परसेंट की राशि रखकर बाकी 80 प्रतिशत राशि कैश में वापस कर देंगे।

ऑफर के एवज में कंपनियों को यह सब्जबाग भी दिखाया जाता था कि यह पैसा सफेद मनी होगा और इसका कंपनी को इनकम टैक्स रिबेट भी मिलेगा। इस लुभावने ऑफर में आठ कंपनियां 65 लाख रुपये गंवा चुकी हैं।

किचन में छिपा रखा था नोटों से भरा बैग-

पुलिस टीम ने संदेही दंपती के हरेक मूवमेंट पर नजर रखना शुरू किया। निखिल, पूनम मॉल से घूमकर फ्लैट में जैसे ही घुसे, सात सदस्यीय पुलिस टीम ने कॉल बेल बजाकर दरवाजा खुलवाया। दंपती ने पुलिस के घर के भीतर घुसने पर आपत्ति जताई। टीम ने विरोध के बावजूद पूरे कमरे की तलाशी ली। किचन में बैग में छिपाकर रखा नकली नोट बरामद होते ही दंपती को गिरफ्तार कर लिया गया।

चुनाव में खपाने की आशंका-

आशंका है कि नकली नोट की प्रिटिंग मशीन से करोड़ों के नोट छपाई हो चुकी है, जिसे विधानसभा चुनाव में खपाने की चर्चा राजनीति के गलियारों में है। पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है। हालांकि, अभी इससे जुड़ा हुआ कोई पुख्ता सबूत हाथ नहीं लगा है।