दलदल में फंसे 4 हाथी को देखने जुटे 4 हजार गांव वाले, हादसा न हो इसके लिए भी रेस्क्यू टीम को जूझना पड़ा

अंबिकापुर/सीतापुर. हाथियों के कुएं में गिरने व उन्हें निकालने के दौरान वन विभाग को दो मोर्चों पर जूझना पड़ा। सीतापुर रेंज अंतर्गत ढेलसरा गांव के करमीमुड़ा पारा में जहां एक नर हाथी एवं तीन बच्चे दलदलनुमा कुएं में गिरे थे वहां विभाग द्वारा चलाए गए रेस्क्यू आपरेशन “गजानन” के दौरान करीब चार हजार लोगों की भीड़ जुट गई। एक तरफ हाथियों की जान तो दूसरी तरफ कोई हादसा न हो, इसके लिए वन विभाग के साथ-साथ पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारियों को जूझना पड़ा। राहत की बात यह रही कि हाथियों को बचाने अभियान में किसी को नुकसान नहीं हुआ। रेस्क्यू आपरेशन में सीतापुर रेंज के दर्जनों अधिकारी-कर्मचारी जुटे रहे। इस दौरान एक युवक हाथियों की चपेट में आने से बचा। हाथी ने कुएं से निकलते ही उसे दौड़ाया लेकिन युवक किसी तरह वहां से बच निकला। बेलजोरा गांव में मंगलवार देर रात फसलों को नुकसान पहुंचा रहे 12 हाथियों को खदेड़ने जब ग्रामीणों ने पटाखे फोड़ शोर मचाया तो दल के सदस्य भागने लगे। पांच हाथी दूसरे रास्ते से रजौटी के पास नदी किनारे ढेलसरा गांव पहुंचे और यहीं चार हाथी अंधेरे में किसान जमुना उरांव के खेत में बने दलदलनुमा कुएं में जा गिरे। सुबह नौ बजे हाथियों को कुएं से बाहर निकालने आपरेशन शुरू हुआ।
10 किमी दूर तक हाथियों को खदेड़ने बंद किए गए सभी रास्ते: हाथियों को बाहर निकालने के बाद उसे गांव से सुरक्षित बाहर निकालने में वन विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ी। ढेलसरा सहित रजौटी गांव के जिस रूट से हाथियों को खदेड़ा जाना था वहां आने-जाने वाले सभी रास्तों में आवाजाही रोक दी गई। चार टीम वाहनों में और बाकी कुछ स्टाफ पैदल हाथियों को दो ओर से घेरकर खदेड़ने में जुट गई। दस किमी तक हाथियों को खदेड़कर रजौटी के पास के जंगल की ओर पहुंचाया गया।
करमीमुड़ा इलाके में जहां हाथियों को बाहर निकालने ऑपरेशन चल रहा था वहां हजारों की भीड़ जुटी थी। इन्हें इलाके से दूर रहने माइक से एनाउंस कर हटाया जा रहा था लेकिन लोग मानने तैयार नहीं थे। इसी दौरान सीतापुर निवासी निप्पी अग्रवाल भी कुएं के पास मौजूद था। जब पहला नर हाथी बाहर निकला तो वह सीधे युवक की ओर दौड़ा। हाथी के पैर से उसका शरीर टकराया। गिरने के बाद युवक किसी तरह वहां से भागकर दूर निकल पाया। आखिरी हाथी ने भी कुएं से निकलने के बाद भीड़ की दौड़ाया। इस दौरान वहां अफरातफरी मच गई।
ग्रामीणों का आरोप- आतंक फिर भी विभाग सक्रिय नहीं
एसडीएम अजय कुमार त्रिपाठी एवं एसडीओ फारेस्ट चूड़ामणी सिंह मौके पर ही डटे रहे। हाथियों को निकालने के लिए वन विभाग की एंटी डिप्रेडेशन टीम ने पहले रणनीति बनाई। पास के दो पेड़ काटे गए और उसकी डंगालें कुएं के किनारे में डाल दी गई ताकि हाथियों को बाहर निकलने में मदद मिल सके। इसके बाद कुएं के बगल से करीब पांच फीट मिट्‌टी काटकर जगह को समतल किया गया। इतना करने के बाद उस इलाके से सभी लोग दूर चले गए।
सीतापुर रेंज में साल भर से 43 हाथियों का आतंक कायम है। इलाके के ललितपुर, बेलजोरा, रजौटी, बेनई, भारतपुर, ढेलसरा, ढोढ़ागांव सहित आसपास के दर्जन भर गांवों के लोग हाथियों के उत्पात से परेशान हैं। मंगलवार रात की घटना को लेेकर ग्रामीणों में विभाग के प्रति नाराजगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बारह हाथियों का दल बेलजोरा इलाके में फसलों को नुकसान पहंुचा रहा था तो वे ही उनसे जूझ रहे थे। वन विभाग का कोई अता-पता नहीं था। सूचना देने पर किसी ने फोन तक रिसीव नहीं किया।
पंचायत के गांवों में एलर्ट के बाद रेस्क्यू आपरेशन
एसडीओ फारेस्ट श्री सिंह ने बताया कि सूचना साढ़े छह बजे मिली। स्टाफ पूरे साजो-सामान के साथ साढ़े सात बजे मौके पर पहुंच गया। हाथियों को बाहर निकालने से पहले इलाके को सुरक्षित करना था, लिहाजा रजौटी पंचायत के पारे-मोहल्लों में माइक से एनांउस करा लोगों को घरों में रहने की हिदायत दी गई। जो किसान खेतों की ओर गए थे उन्हें वापस बुलाया गया। यह सब करने में घंटे भर लगा। साढ़े आठ बजे के बाद टीम ने कुएं से हाथियों को बाहर निकालने रेस्क्यू आपरेशन शुरू किया।